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06/09/2025
एक बिन माँ बाप की लड़कीं थी। अपने ननिहाल में पल पोश कर बड़ी हो रही थी। कुछ ही क्लास पढ़ा लिखा कर घर में ननिहाल वाले सारा का...
06/09/2025

एक बिन माँ बाप की लड़कीं थी। अपने ननिहाल में पल पोश कर बड़ी हो रही थी। कुछ ही क्लास पढ़ा लिखा कर घर में ननिहाल वाले सारा काम करवाते थे। कभी कभी साग सब्जी लेने बाजार जाती रहती थी। एक दिन उस के लड़की से कही रुपया गिर गया। वह लड़कीं घबरा कर, कई सब्जी वालो से कहने लगी। कि आप सब्जी उधार दे दीजिये। मैं दो चार दिन में आप को पैसे दे दूँगी। लेकिन कोई सब्जी वाला उधार देने को तैयार नही था। यह बात एक लड़का सुन कर बोला कि, मैडम! आप को कितने पैसों की जरूरत हैं। उसने ₹५०० की नोट निकाल कर देते हुए बोला कि, आप के पास जब हो जाएगा। तो वापस कर देना। लड़कीं बोली कि सर! आप को कहाँ खोजूँगी। लड़का बोला कि, मैं बहुत बड़ा आदमी नही हूँ। प्रतिदिन हम इसी समय सब्जी या फल लेने बाजार आया करता हूँ। लड़कीं जब भी बाजार आती थी। लड़का भी संयोग से मिल जाता था। लड़कीं मिल कर बहुत शर्मिंदगी महसूस करती थी। लड़का भी कुछ नही कहता था। जब एक हप्ता हो गया। तो लड़कीं पूरी बात बताई की सर! मैं अपने ननिहाल में रहती हूँ। सब्जी में से रोज कुछ पैसे बचाती हूँ। तो वही इकठ्ठा कर के दे दूँगी। लड़का बोला कि, हमे आप से कोई पैसे नही चाहिये। अगर कभी भी जरूरत पड़े तो हम आप की मदद और कर देंगे। उस दिन से वह लड़कीं जब देखती थी। तो सर! नमस्ते कहती थी। वह लड़का भी नमस्ते कर के चल देता था। लेकिन उस लड़के से वह मिल कर बहुत खुश होती थी। लड़का भी उस लड़की से मिलने के बहाने आया करता था। कभी कभी लड़कीं के ननिहाल वाले ताने मारते थे। कि जवान हो गयी हैं। मर भी नही गयी। अब तो शादी का सारा खर्च हम लोग को ही उठाना हैं। एक दिन उस लड़की ने उस लड़के से बोली कि, सर! क्या आप अपने घर झाड़ू पोछा मारने के लिये, मुझे रख लेंगे। हमे अब ननिहाल में घुटन महसूस होता हैं। लड़का हँसते हुए बोला कि, ठीक हैं। हमको अपने मम्मी पापा से पूछ लेने दीजिये। संयोग देखिये, वह एक जरुरी काम से बाहर चला गया। लड़कीं जब भी बाजार आती। उसी लड़के को, उसकी नजरे ढूढ़ती थी। वह लड़कीं निराश हो गयी। किसी ने शिकायत भी कर दी। सब्जी लेने के बहाने किसी लड़के से मिलती हैं। अब रोज ननिहाल वाले प्रताड़ित करने लगे थे। लड़कीं उब कर मन में सोच ली। कि आज अगर वह लड़का नही मिला तो आत्महत्या कर लूँगी। अजीब संयोग देखिये। उस दिन वह लड़का तब तक दिखाई दे दिया। लड़कीं उस लड़के को देख कर अपने आँसुओं को रोक न सकी। और नम आँखों से बोली कि सर! आप कहाँ चले गए थे। लड़कीं के नम आंखों को, देख लड़का बोला कि, आप से एक बात बोलूँ! आप नाराज तो नही होंगी। लड़कीं कही कि सर बोलिये! लड़का बोला कि, क्या आप मुझसे शादी करेंगी। कोई दबाव नही हैं। यह सुन लड़कीं फफक कर रोने लगी। लड़का हाथ को बढ़ाते हुए गले लगा लिया। वह खुद अपनी आँसुओं को रोक न सका। लड़कीं को ऐसा लग रहा था। कि दुनिया ही मिल गयी। लड़के ने कहा कि, कल अपने हम मम्मी पापा को लेकर आप के ननिहाल आएंगे। हमें कुछ नही चाहिये। बस लोग आप को ताने न मार सके कि, आप ने भाग कर शादी की। घर सबको जाकर बता देना। फिर भी लड़कीं घर कुछ नही बताई। अचानक एक बहुत कीमती कार खड़ी होती हैं। उसमे से वह लड़का व उसके मम्मी पापा निकलते हैं। लड़कीं के ननिहाल वाले चौक गए। वह बोले कि आप सब! लड़के की मम्मी पापा बोले कि, आप की भांजी का हाथ माँगने आये हैं। हमने मुहूर्त निकाल कर सब इन्तजाम कर लिया हैं। आप केवल लड़कीं लेकर आ जाना। हमारे बारे में अगर जानकारी करना चाहते हो तो पता कर लेना। शहर का सबसे बड़ा रहीस हूँ। मुझे कुछ नही चाहिये। हमारे लिये दुल्हन ही दहेज हैं। लड़के के मम्मी पापा अपने सारे खर्च से बड़ी धूमधाम से विवाह की। वह लड़कीं ससुराल पहुँच कर घर में अपने सास ससुर के मरते वक्त तक बहुत सेवा व देखभाल की।

शहर के एक बड़े स्कूल में अर्जुन सर पढ़ाते थे। उम्र करीब 28 साल, लेकिन पढ़ाने का अंदाज़ और उनकी सादगी की वजह से हर स्टूडे...
05/09/2025

शहर के एक बड़े स्कूल में अर्जुन सर पढ़ाते थे। उम्र करीब 28 साल, लेकिन पढ़ाने का अंदाज़ और उनकी सादगी की वजह से हर स्टूडेंट उन्हें बहुत मानता था।
वो कभी गुस्से से नहीं, बल्कि प्यार और समझदारी से पढ़ाते थे।

क्लास 11 में एक लड़की थी – काव्या। पढ़ाई में तेज़, लेकिन बहुत कम बोलने वाली। ज़्यादातर बच्चे खेल, मस्ती और ग्रुप में रहते थे, लेकिन काव्या हमेशा अकेली रहती।

अर्जुन सर ने नोटिस किया कि वो हमेशा चुप रहती है। एक दिन क्लास के बाद उन्होंने काव्या को रोका और कहा –
“काव्या, सब ठीक है? तुम हमेशा इतनी खामोश क्यों रहती हो?”

काव्या ने झूठा मुस्कुरा कर कहा – “जी सर, सब ठीक है।”
लेकिन उनकी आँखें कुछ और कह रही थीं।

धीरे-धीरे सर को समझ आया कि काव्या अपने घर की परेशानियों से जूझ रही है। उसके पापा का बिज़नेस डूब गया था, और अब घर चलाना मुश्किल हो रहा था। काव्या अक्सर बिना नाश्ता किए स्कूल आती और किताबें पुरानेपन से भरी रहतीं।

अर्जुन सर ने बिना बताए उसकी मदद करना शुरू किया। कभी किताबें नई दिला दीं, कभी फीस का इंतज़ाम करवा दिया। काव्या को धीरे-धीरे महसूस हुआ कि सर उसे सिर्फ़ स्टूडेंट की तरह नहीं, बल्कि एक इंसान की तरह समझते हैं।

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प्यार का एहसास

काव्या के दिल में अर्जुन सर के लिए एक अलग जगह बनने लगी।
जब भी सर क्लास में मुस्कुराते, काव्या का दिन बन जाता।
धीरे-धीरे दोनों के बीच स्टूडेंट-टीचर वाली दूरी कम होने लगी।

एक दिन प्रैक्टिकल के बहाने काव्या देर तक स्कूल में रुक गई। स्टाफ रूम खाली था, और सर वहीं बैठे थे।
काव्या ने हिम्मत करके पूछा –
“सर, आप इतना क्यों करते हैं मेरे लिए? बाकी टीचर्स को तो परवाह भी नहीं।”

अर्जुन सर ने उसकी आँखों में देखकर कहा –
“क्योंकि तुममें वो मेहनत है, जो मैंने बहुत कम लोगों में देखी है। मैं नहीं चाहता कि तुम्हारा टैलेंट हालातों की वजह से दब जाए।”

काव्या के होंठ कांप गए, उसकी आँखें भर आईं।
उस दिन दोनों के बीच एक ऐसी खामोशी छाई, जिसमें दिल की बातें छुपी थीं।

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मोहब्बत और डर

काव्या अब सर से मिलने के बहाने ढूँढने लगी।
कभी नोट्स पूछने, कभी डाउट क्लियर करने।
वहीं अर्जुन सर भी महसूस करने लगे कि उनकी ज़िंदगी में काव्या की मौजूदगी उन्हें बहुत सुकून देती है।

लेकिन हर बार सर खुद को रोक लेते।
वो जानते थे कि ये रिश्ता समाज की नज़र में गलत माना जाएगा।
उन्हें डर था – अगर किसी को पता चल गया तो?

फिर भी, दिल के जज़्बात कहाँ किसी से छुपते हैं।
एक दिन काव्या ने साफ़ कह दिया –
“सर, मुझे आपसे प्यार हो गया है। चाहे आप कुछ भी कहें, मैं इसे बदल नहीं सकती।”

अर्जुन सर चौंक गए।
कुछ पल खामोश रहने के बाद बोले –
“काव्या, तुम्हारी उम्र अभी छोटी है। ये मोहब्बत नहीं, सिर्फ़ आकर्षण है।”

लेकिन काव्या ने आँखों में आँसू लिए कहा –
“नहीं सर, ये दिल का रिश्ता है। मैं आपको समझती हूँ, महसूस करती हूँ। यही सच्चा प्यार है।”

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रिश्ते की सच्चाई

अब दोनों के बीच चुपचाप एक रिश्ता बनने लगा।
बातें सिर्फ पढ़ाई से शुरू होतीं, लेकिन खत्म हमेशा मुस्कुराहट और इमोशन्स पर होतीं।

अर्जुन सर दिल से चाहते थे कि काव्या का करियर बने, उसकी लाइफ अच्छी हो।
वहीं काव्या चाहती थी कि सर उसकी ज़िंदगी का हिस्सा बनें।

समय गुजरता गया, काव्या ने टॉप किया और कॉलेज में दाख़िला मिला।
विदाई के दिन उसने अर्जुन सर से कहा –
“सर, जब मैं बड़ी हो जाऊँगी और सब सही वक्त होगा… तब मैं आपको अपने दिल की रानी बना लूँगी।”

सर बस मुस्कुरा कर रह गए।
लेकिन दिल से वो भी यही चाहते थे।

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🙏🏻🙏🏻🙏🏻
Coppy Peste

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अकबर ने 7 फ़ीट 8 इंची बहलोल_खान को भेजा था महाराणा_प्रताप का सर लाने, कभी नहीं हारा था बहलोल मुगली अकबर का सबसे खतरनाक वा...
26/08/2025

अकबर ने 7 फ़ीट 8 इंची बहलोल_खान को भेजा था
महाराणा_प्रताप का सर लाने, कभी नहीं हारा था बहलोल
मुगली अकबर का सबसे खतरनाक वाला एक सेना नायक हुआ नाम - बहलोल खां
कहा जाता है कि हाथी जैसा बदन था इसका और ताक़त का जोर इतना कि नसें फटने को होती थीं
ज़ालिम इतना कि तीन दिन के बालक को भी गला रेत-रेत के मार देता था बशर्ते वो हिन्दू का हो
एक भी लड़ाई कभी हारा नहीं था अपने पूरे करियर में ये बहलोल खां ॥
काफी लम्बा था, 7 फुट 8 इंच की हाइट थी, कहा जाता है की घोडा उसने सामने छोटा लगता था ॥ बहुत चौड़ा और ताकतवर था बहलोल खां, अकबर को बहलोल खां पर खूब नाज था, लूटी हुई औरतों में से बहुत सी बहलोल खां को दे दी जाती थी ॥
फिर हल्दीघाटी का युद्ध हुआ, अकबर और महाराणा प्रताप की सेनाएं आमने सामने थी, अकबर महाराणा प्रताप से बहुत डरता था इसलिए वो खुद इस युद्ध से दूर रहा ॥
अब इसी बहलोल खां को अकबर ने भिड़ा दिया हिन्दू-वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप से
लड़ाई पूरे जोर पर और मुगलई गंद खा-खा के ताक़त का पहाड़ बने बहलोल खां का आमना-सामना हो गया अपने प्रताप से ॥
अफीम के ख़ुमार में डूबी हुई सुर्ख नशेड़ी आँखों से भगवा अग्नि की लपट सी प्रदीप्त रण के मद में डूबी आँखें टकराईं और जबरदस्त भिडंत शुरू. . . कुछ देर तक तो राणा यूँ ही मज़ाक सा खेलते रहे मुगलिया बिलाव के साथ
और फिर गुस्से में आ के अपनी तलवार से एक ही वार में घोड़े सहित हाथी सरीखे उस नर का पूरा धड़ बिलकुल सीधी लकीर में चीर दिया
ऐसा फाड़ा कि बहलोल खां का आधा शरीर इस तरफ और आधा उस तरफ गिरा ॥
ऐसे-ऐसे युद्ध-रत्न उगले हैं सदियों से भगवा चुनरी ओढ़े रण में तांडव रचने वाली मां भारती ने...

ाराणा ेवाड


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