19/05/2026
मधुर भंडारकर का बचपन बहुत गरीबी में गुज़रा था। वो छठी क्लास में फेल हो गए थे। और उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी। फिर वो एक वीडियो पार्लर में काम करने लगे। उनका काम था वीडियो कैसेट्स की डिलीवरी करना।
मधुर भंडारकर अपनी साइकिल पर वीडियो कैसेट्स डिलीवर करने जाते थे। और तब उनका एक्टर्स, बार गर्ल्स, अंडरवर्ल्ड के लोगों व बिजनेसमैन के यहां खूब जाना होता था। ये काम उन्होंने चार-पांच सालों तक किया था।
मधुर भंडारकर ने बताया था कि तभी से वो ह्यूमन बिहेवियर को समझना शुरू कर चुके थे। वो लोगों से बात करते थे। और उन्हें बहुत बारीकी से ऑब्ज़र्व करते थे।
मधुर उस दौरान जिन एक्टर्स को वीडियो कैसेट्स की डिलीवरी देते थे, उनमें मिथुन चक्रवर्ती इकलौते थे जिन्होंने फ़िल्मी दुनिया में आने के बाद मधुर को पहचाना था, कि ये तो वही लड़का है जो कभी वीडियो कैसेट्स की डिलीवरी देने आता था।
उस फेज़ में मधुर भंडारकर को फ़िल्मों का बहुत ज्ञान हो गया था। फिर एक वक्त आया जब मधुर भंडारकर राम गोपाल वर्मा के असिस्टेंट बन गए। राम गोपाल वर्मा के पास भी मधुर भंडारकर ने तीन-चार सालों तक काम किया था।
और रंगीला के रिलीज़ होने के बाद मधुर ने राम गोपाल वर्मा से खुद को अलग कर लिया। और अगले दो सालों तक मधुर भंडारकर इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर कोई फ़िल्म हासिल करने की कोशिश में लगे रहे।
बकौल मधुर, जब वो प्रोड्यूसर्स को अपनी कहानी सुनाते थे तो उनसे कहा जाता था कि ये तो कुछ ज़्यादा ही श्याम बेनेगल व गोविंद निहलानी टाइप की कहानी हैं।
ये सब चलता नहीं है। वो लोग मधुर से कहते थे कि कोई कमर्शियल फ़िल्म की कहानी लाओ। जब कमर्शियल फ़िल्म बनाकर कामयाब हो जाओगे तब कोई मैसेज बेस्ड फ़िल्म तुम बना सकते हो।
चूंकि मधुर भंडारकर उस वक्त बेरोजगार थे। और उन्हें हर हाल में एक ब्रेक चाहिए था। तो उन्होंने एक कमर्शियल फ़िल्म की स्क्रिप्ट तैयार की। वो फ़िल्म थी त्रिशक्ति। मधुर कहते हैं कि जब आप इनसिक्योर होते हैं तो जो कोई भी आपको कुछ बताता है, आप वही करने को तैयार हो जाते हैं।
मधुर से कहा गया कि एक्शन डालो, हैलिकॉप्टर का सीन डाल दो, आइटम नंबर डाल दो, बिकिनी सीन्स डाल दो। मधुर ने त्रिशक्ति में वैसा ही किया। मधुर कहते हैं कि उन्हें पता था कि ये फ़िल्म उनके लिए कुछ खास नहीं करने वाली है।
वही हुआ भी। 1999 में त्रिशक्ति रिलीज़ हुई थी। और बुरी तरह फ्लॉप भी हो गई थी। फ़िल्म इंडस्ट्री के कई लोगों ने मधुर भंडारकर का करियर खत्म घोषित कर दिया।
मधुर एक बार फिर से मुश्किलों में थे। कड़ा संघर्ष सामने था। मधुर ने बड़े स्टार्स के सेक्रेट्ररीज़ से जान-पहचान बनानी शुरू की। मधुर ने उनसे रिक्वेस्ट की कि वो लोग मधुर को भी फ़िल्मी पार्टीज़ में इनवाइट करें।
और मधुर ने ये सब इसलिए किया क्योंकि अब तक मधुर को अब तक अहसास हो गया था कि उन्हें कॉन्टैक्ट्स बनाने होंगे। जो दिखता है वही बिकता है।
मधुर बताते हैं कि फ़िल्मी पार्टीज़ में कई दफ़ा ऐसा हुआ जब उन्हें बहुत लज्जित महसूस हुआ। इन फ़िल्मी पार्टीज़ में कई ऐसे एक्टर्स मधुर को ऐसे मिले जिनसे मधुर ने बात करने की कोशिश की तो उन्होंने बस हैलो कहा और मुंह दूसरी तरफ़ घुमा लिया। उनमें से कुछ एक्टर्स तो ऐसे भी थे जिन्होंने आगे चलकर खुशी-खुशी मधुर भंडारकर की फ़िल्मों में काम किया।
मधुर कहते हैं कि उन पार्टीज़ में जाकर ही उन्हें इस फ़िल्म इंडस्ट्री का गेम समझ में आया। आपको बहुत प्रैक्टिकल होना पड़ता है। ये फ़िल्म इंडस्ट्री ऐसी है जहां हर रविवार को दोस्त और दुश्मन बनते-बदलते रहते हैं। इसलिए इस इंडस्ट्री पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
दो सालों बाद, 2001 में मधुर भंडारकर को चांदनी बार फ़िल्म बनाने का चांसमिला। एक ऐसी फ़िल्म जिसे मधुर भंडारकर दिल से बनाना चाहते थे। चांदनी बार रिलीज़ हुई। और फिर सबकुछ बदल गया। मधुर की लाइफ़ रातों रात फ़र्श से अर्श पर पहुंच गई।
फिर तो मधुर ने सत्ता, आन, पेज थ्री, कॉरपोरेट, ट्रैफ़िक सिग्नल, फैशन, जेल व हीरोइन जैसी बहुचर्चित फ़िल्में बनाई। और भी कुछ फ़िल्में बनाई। मधुर की फ़िल्म चांदनी बार ने कई नेशनल अवॉर्ड्स जीते। ट्रैफ़िक सिग्नल के लिए मधुर को नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट डायरेक्शन मिला। और कुछ अवॉर्ड्स भी मधुर भंडारकर ने जीते। और मधुर भंडारकर भी फ़िल्म इंडस्ट्री के सक्सेसफ़ुल डायरेक्टर्स में से एक बन गए।