19/11/2018
हमारा शिक्षा व्यवस्था एक ढोंग है ! वो हमें यह नहीं सिखाते जो जीवन और मानवता के लिए आवश्यक है बल्कि वो सिखाते हैं जो हमें आदर्श मानव बनने से रोक ले ! हम बच्चों से यह अपेक्षा करते हैं कि उसके नंबर रटते हुए भी अच्छे आएं भले ही वो चारित्रिक विकास में शून्य रहे !
शिक्षा का उद्देश्य मानवता के विकास से है, सहयोग से है, दूसरों के लिए सम्मान से है, नैतिकता से है ! जैसे विज्ञान इसलिए पढ़ाया जाना चाहिए कि बच्चे अपने औऱ पर्यावरण के कार्यशैली को समझ सके और भविष्य में उसके संतुलन का ख्याल रखे ! उसी तरह सामाजिक विज्ञान से अपने और समाज के पारस्परिक संबंध को समझ कर उसकी बेहतरी के लिए जीवन लगाए !
शिक्षा का उद्देश्य आज समाज ने बस डिग्री और जीवनयापन के कार्य तक सीमित रख दिया है !
हम दिन रात बस अर्थ के साधन जुटाने में लगे रहते हैं, यह जानते हुए भी कि वो भी क्षणभंगुर है ! हम इस क्षणिक उद्देश्य की पूर्ति के लिये न जाने कितने लोगों से झूठ बोलते हैं, कितनो का अपमान करने से भी नहीं चूकते, कितनो को अपना आदर्श मान बैठते हैं और कितनो को नीचता की दृष्टि से देखते हैं !
हमें पर्यावरण की चिंता नहीं है, हमें अन्य जीव जंतुओं का ख्याल नहीं है, हम प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं ! हमें अगली पीढ़ी के भविष्य का भी तो ख्याल नहीं है, वो कैसा जल पीयेंगे, कैसी वायू में सांस लेंगे, कैसे कृषि कार्य कर पाएंगे रासायनिक भूमि पर ! शायद हमें भविष्य में एक अच्छे उदाहरण के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाएगा !
हमें एक अच्छे इंजीनियर, डॉक्टर, नेता, कलाकार, इत्यादि बनने से पहले एक अच्छा मानव बनना चाहिए ! मानवता के विकास पे ज्यादा ध्यान देना चाहिए, व्यक्तिगत रूप से भी और सामाजिक रूप से भी ! आज के व्यावसायिक शिक्षा से बाहर निकलकर सामाजिक और नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए !
Santosh Jha