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With Total Gaming – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
24/01/2026

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बहुत समय पहले, जब हनुमान जी छोटे बालक थे, तब वे अत्यंत चंचल, शक्तिशाली और निष्कपट थे। एक दिन प्रातःकाल उन्होंने आकाश में...
05/01/2026

बहुत समय पहले, जब हनुमान जी छोटे बालक थे, तब वे अत्यंत चंचल, शक्तिशाली और निष्कपट थे। एक दिन प्रातःकाल उन्होंने आकाश में उगते हुए लाल-लाल सूर्य को देखा। बाल हनुमान को लगा कि यह कोई मीठा फल है।

उन्होंने मन ही मन कहा—
“आज तो बढ़िया फल मिला है!”

बस फिर क्या था! बाल हनुमान आकाश की ओर उछल पड़े। उनकी गति इतनी तेज़ थी कि देवता भी चकित रह गए। सूर्य देव भयभीत हो उठे। इंद्र देव ने उन्हें रोकने के लिए अपना वज्र चलाया, जिससे बाल हनुमान मूर्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़े।

यह देखकर पवन देव क्रोधित हो गए। उन्होंने पूरी पृथ्वी से वायु का संचार रोक दिया। चारों ओर हाहाकार मच गया। देवता घबरा गए और ब्रह्मा जी के पास पहुँचे।

ब्रह्मा जी ने बाल हनुमान को जीवनदान दिया और कहा—
“यह बालक अमर रहेगा और किसी अस्त्र-शस्त्र से इसका नाश नहीं होगा।”

🐘 गणेश और कार्तिकेय की परिक्रमा कथा (विस्तृत)एक बार कैलाश पर्वत पर देवताओं की सभा लगी हुई थी। उसी समय देवर्षि नारद वहाँ ...
04/01/2026

🐘 गणेश और कार्तिकेय की परिक्रमा कथा (विस्तृत)
एक बार कैलाश पर्वत पर देवताओं की सभा लगी हुई थी। उसी समय देवर्षि नारद वहाँ पहुँचे। उनके हाथ में एक दिव्य फल था, जिसे ज्ञान और अमरत्व का प्रतीक माना जाता था। नारद जी ने वह फल भगवान शिव को दिया और कहा—

“यह फल केवल एक ही संतान को दिया जा सकता है, जो सबसे योग्य हो।”

भगवान शिव और माता पार्वती दुविधा में पड़ गए कि यह फल किसे दिया जाए—
गणेश को, जो बुद्धि और विनम्रता के प्रतीक थे,
या कार्तिकेय को, जो पराक्रम और शौर्य के प्रतीक थे।

तब माता पार्वती ने एक परीक्षा रखने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा—

“जो पहले पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके वापस आएगा, वही इस फल का अधिकारी होगा।”

🚩 कार्तिकेय का मार्ग
कार्तिकेय तुरंत अपने मयूर पर सवार हुए और तेज़ गति से पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। उन्हें अपने बल, गति और पराक्रम पर पूरा विश्वास था।

🧠 गणेश की बुद्धि
गणेश जी ने सोचा—

“मैं मोटा हूँ, मेरे पास कोई तेज़ वाहन नहीं है। अगर मैं पृथ्वी की परिक्रमा करने गया, तो हार निश्चित है।”

लेकिन गणेश जी बुद्धि के देवता थे। उन्होंने गहराई से विचार किया और फिर मुस्कुराते हुए माता-पिता के पास आए।

उन्होंने पहले भगवान शिव और माता पार्वती को प्रणाम किया और फिर तीन बार उनकी परिक्रमा की।

माता पार्वती ने आश्चर्य से पूछा—

“गणेश, तुम पृथ्वी की परिक्रमा क्यों नहीं कर रहे?”

गणेश जी ने विनम्रता से उत्तर दिया—

“मेरे लिए माता-पिता ही संपूर्ण ब्रह्मांड हैं।
आपकी परिक्रमा करना ही पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है।”

भगवान शिव और माता पार्वती यह सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने गणेश जी को गले लगाया और वही दिव्य फल उन्हें प्रदान कर दिया।

कुछ समय बाद कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करके लौटे, लेकिन तब तक निर्णय हो चुका था। कार्तिकेय को पहले क्षण में दुःख हुआ, पर बाद में उन्हें भी गणेश जी की बुद्धि का सम्मान हुआ।

गणेश जी का जन्मकहानी:माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश जी को बनाया और द्वारपाल बनाया। शिव जी ने अनजाने में उनका ...
04/01/2026

गणेश जी का जन्म

कहानी:
माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश जी को बनाया और द्वारपाल बनाया। शिव जी ने अनजाने में उनका सिर काट दिया। बाद में हाथी का सिर लगाकर गणेश जी को पुनर्जीवित किया गया और उन्हें प्रथम पूज्य घोषित किया गया।

संदेश:
👉 आज्ञाकारिता, पुनर्जन्म की आशा और यह कि बुद्धि व संयम शक्ति से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

विघ्नहर्ता गणेश का विकराल रूपएक समय की बात है, विघ्नासुर नाम का भयंकर असुर तीनों लोकों में आतंक मचाने लगा। वह हर यज्ञ, ह...
04/01/2026

विघ्नहर्ता गणेश का विकराल रूप
एक समय की बात है, विघ्नासुर नाम का भयंकर असुर तीनों लोकों में आतंक मचाने लगा। वह हर यज्ञ, हर शुभ कार्य में भयंकर विघ्न डाल देता था। देवता, ऋषि और मनुष्य सभी उससे भयभीत थे।

देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की। शिव जी ने गणेश जी को बुलाया।
उस समय गणेश जी ने विकराल रूप धारण किया—
आँखें अग्नि के समान जल रही थीं, सूँड से चिंगारियाँ निकल रही थीं, और दाँतों से गर्जना हो रही थी। आकाश तक उनका स्वर गूँज उठा।

गणेश जी ने विघ्नासुर को ललकारा। भयंकर युद्ध हुआ। पृथ्वी काँप उठी, दिशाएँ डोलने लगीं।
अंत में विघ्नासुर काँपता हुआ गणेश जी के चरणों में गिर पड़ा।

गणेश जी ने उसे पूर्णतः नष्ट नहीं किया, बल्कि कहा—
“तू हर कार्य में विघ्न बनेगा, लेकिन जहाँ मेरा नाम लिया जाएगा, वहाँ से तू तुरंत भाग जाएगा।”

इस प्रकार गणेश जी विघ्नहर्ता कहलाए और उनका विकराल रूप भी करुणा में बदल गया।

भगवान गणेश की बुद्धि की लीलाएक बार की बात है, देवर्षि नारद भगवान शिव और माता पार्वती के पास पहुँचे। उन्होंने भगवान गणेश ...
04/01/2026

भगवान गणेश की बुद्धि की लीला

एक बार की बात है, देवर्षि नारद भगवान शिव और माता पार्वती के पास पहुँचे। उन्होंने भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय को एक दिव्य फल दिया और कहा,
“इस फल को वही पाएगा जो पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके पहले लौटे।”

माता पार्वती ने दोनों पुत्रों को प्रतियोगिता की अनुमति दे दी।
भगवान कार्तिकेय तुरंत अपने वाहन मोर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े।

लेकिन भगवान गणेश शांत भाव से बैठे रहे। थोड़ी देर बाद उन्होंने अपने माता-पिता की परिक्रमा की और हाथ जोड़कर खड़े हो गए।
जब माता पार्वती ने कारण पूछा, तो गणेश जी बोले—
“मेरे लिए माता-पिता ही संपूर्ण ब्रह्मांड हैं। उनकी परिक्रमा करना ही पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है।”

यह सुनकर शिव-पार्वती अत्यंत प्रसन्न हुए और वह दिव्य फल भगवान गणेश को दे दिया।
जब कार्तिकेय लौटे, तो उन्हें समझ आया कि बुद्धि, बल से बड़ी होती है।

शाम के समय देवी मां को इग्नोर ना करें।कमेंट में देवी मां लिखकर जाएं।आपकी सारी मन्नत पूरी होगी।
03/01/2026

शाम के समय देवी मां को इग्नोर ना करें।
कमेंट में देवी मां लिखकर जाएं।
आपकी सारी मन्नत पूरी होगी।

शाम को जाते-जाते अपने घर ।दुर्गा मां का दर्शन करते जाओ।
03/01/2026

शाम को जाते-जाते अपने घर ।
दुर्गा मां का दर्शन करते जाओ।

लिख दो जय श्री बजरंगबली ❤️❤️❤️
03/01/2026

लिख दो जय श्री बजरंगबली ❤️❤️❤️

03/01/2026

सुबह-सुबह इग्नोर ना करें
जय श्री राम लिखो सारी मन्नत पूरी होगी

इग्नोर ना करें like ❤️ कर के जाए आपकी सारी मन्नत पूरी होगी।
02/01/2026

इग्नोर ना करें like ❤️ कर के जाए
आपकी सारी मन्नत पूरी होगी।

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