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New CINE YUG 90 की दशक की फिल्मे, सिंगल स्क्रीन थिएटर और टुरिंग टॉकीज, तथा अभी हो रहे बदलाव की अपडेट..,,मेरे अनुभव

पुरानी यादें ताजा: जब साल 2023 में मैंने बाराशिव (जि. हिंगोली )मेले में लगाई थी कांति शाह की 'मुन्नीबाई'! 🎬🔥साल 2023 की ...
21/05/2026

पुरानी यादें ताजा: जब साल 2023 में मैंने बाराशिव (जि. हिंगोली )मेले में लगाई थी कांति शाह की 'मुन्नीबाई'! 🎬🔥
साल 2023 की वो यादें आज भी दिल के बेहद करीब हैं, जब मैंने खुद बाराशिव यात्रा (मेले) में 'सिनेयुग टूरिंग टॉकीज' के बड़े पर्दे पर मशहूर निर्देशक कांति शाह की सुपरहिट और धमाकेदार फिल्म 'मुन्नीबाई' को प्रदर्शित (स्क्रीन) किया था!
वह अनुभव वाकई अद्भुत था। जैसे ही टॉकीज के तंबू पर 'मुन्नीबाई' का पोस्टर लगा, दर्शकों का उत्साह देखने लायक था। मुझे लगा कीं 90s ka दौर वापस लाने मे मै कामयाब रहा...टिकट खिड़की पर भीड़, लाउडस्पीकर का शोर, और पर्दे पर फिल्म शुरू होते ही दर्शकों की वो सीटियां और तालियां... उस माहौल ने टूरिंग टॉकीज के सुनहरे दौर की याद दिला दी।
कांति शाह की फिल्मों का जो क्रेज ग्राउंड लेवल पर है, उसे मैंने खुद साल 2023 मे आजमाकर देखा और महसूस किया है। सिनेमा का असली मजा जनता के बीच इसी तरह तंबू वाले टॉकीज में ही आता है!🍿✨
👉 क्या आपमें से कोई साल 2023 की उस बाराशिव यात्रा में मेरे 'सिनेयुग टॉकीज' का हिस्सा बना था? किसने-किसने कहा 'मुन्नीबाई' फिल्म देखी थी? अपनी यादें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं! 👇
पेज को फॉलो जरूर करे l

19/05/2026
------------------------------ *जब दीवारें बोलती थीं और पोस्टर ही ट्रेलर होते थे!* 🎬✨क्या आपको वो दौर याद है? जब फ्राइडे...
19/05/2026

------------------------------ *जब दीवारें बोलती थीं और पोस्टर ही ट्रेलर होते थे!* 🎬✨
क्या आपको वो दौर याद है? जब फ्राइडे को फिल्म रिलीज होने से पहले सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की दीवारों पर बड़े-बड़े हाथ से रंगे या छपे हुए पोस्टर लगाए जाते थे.
वह ब्रश का स्ट्रोक, वह चटकीले रंग और हीरो का वह एंग्री यंग मैन वाला लुक! मोबाइल और यूट्यूब के इस दौर में वो बात कहां, जो उस वक्त सिंगल स्क्रीन टॉकीज के बाहर पोस्टर देखकर फिल्म की कहानी का अंदाजा लगाने में थी.
आज भी जब किसी पुरानी टॉकीज के पास से गुजरते हैं और वहां नया पोस्टर लगा देखते हैं, तो दिल सीधे बचपन और सीटियों के दौर में चला जाता है.
आपकी पसंदीदा सिंगल स्क्रीन टॉकीज कौन सी थी, कमेंट में जरूर बताएं! 👇
*पेज को फोल्लोव जरूर करे l*

सिनेयुग टुरिंग टॉकीज फिर से आ रहा है वापस! 🎥✨नमस्कार सिनेमा प्रेमियों! 🍿 जवळा बाजार (जि. हिंगोली) के हमारे प्यारे दर्शको...
17/05/2026

सिनेयुग टुरिंग टॉकीज फिर से आ रहा है वापस! 🎥✨
नमस्कार सिनेमा प्रेमियों! 🍿 जवळा बाजार (जि. हिंगोली) के हमारे प्यारे दर्शकों के लिए बड़ी खुशखबरी!
पिछले लगभग 15 दिनों से कुछ तकनीकी दिक्कतों (Technical Issues) के कारण हमारा सिनेयुग टुरिंग टॉकीज पूरी तरह से बंद था. आपकी तरह हम भी सिनेमा के इस सफर को बहुत मिस कर रहे थे.
बड़ी अपडेट: 🛠️🚚
आज सिनेयुग टुरिंग टॉकीज की पूरी टीम खराब हुई मशीनरी को रिपेयर (Repair) कराने के लिए मुंबई के लिए रवाना हो चुकी है. हम अपनी मशीनों को दुरुस्त कर रहे हैं ताकि आपको पहले जैसा ही बेहतरीन अनुभव मिल सके.
अब मिलेगा थिएटर जैसा असली मज़ा! 🔊🔥
इस बार हम सिर्फ लौट नहीं रहे हैं, बल्कि आपके लिए एक बड़ा सरप्राइज लेकर आ रहे हैं! पहले हमारे पास 'मोनो साउंड' (Mono Sound) था, लेकिन अब जब टॉकीज दोबारा शुरू होगी, तो आपको धमाकेदार '5.1 साउंड सिस्टम' (5.1 Sound System) का अनुभव मिलेगा! अब हर डायलॉग और हर गाना सीधे आपके दिल को छुएगा.
वही पुराने और सस्ते टिकट रेट: 🎟️💰
सुविधाएं नई हैं, लेकिन दाम आज भी वही पुराने और सस्ते हैं:

* जमीन (Floor): मात्र ₹20
* खुर्ची (Chair): मात्र ₹30

शो का समय (Daily 2 Shows): ⏰🎬

* पहला शो: दोपहर 12:30 बजे
* दूसरा शो: रात 09:00 बजे

90s के दर्शकों के लिए खुशखबरी: 🎉📺
सिर्फ 3-4 दिनों का इंतजार और! इसके बाद जवळा बाजार में 90 के दशक (90s) के हमारे प्यारे दर्शकों के लिए सिनेयुग टुरिंग टॉकीज फिर से शुरू होने जा रहा है. वही पुरानी यादें, वही जादू और अब नए साउंड का धमाका एक बार फिर आपके सामने होगा.
आपकी पसंद, हमारा पर्दा! 👇🤔
इस नए और दमदार 5.1 साउंड सिस्टम पर आप सबसे पहले कौन सी फिल्म देखना पसंद करेंगे? अपनी पसंदीदा 90s की फिल्म का नाम नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं! जिस फिल्म की मांग सबसे ज्यादा होगी, वही बड़े पर्दे पर चलेगी!
लोकेशन और संपर्क: 📍📞

* पता: सिनेयुग टुरिंग टॉकीज, जवळा बाजार, जिला - हिंगोली, महाराष्ट्र.
* फ़ोन नंबर: 8622 8622 52
* व्हाट्सएप नंबर: 9850380492

हमारे साथ बने रहने और आपके इस प्यार के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!
जल्द ही मिलते हैं पर्दे पर! 🎬🎞️


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------------------------------ # # 🎪 सिनेयुग टूरिंग टॉकीज: जहाँ आज भी धड़कता है 90s का दिल! ❤️🎬आज के इस डिजिटल दौर में, ...
14/05/2026

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# # 🎪 सिनेयुग टूरिंग टॉकीज: जहाँ आज भी धड़कता है 90s का दिल! ❤️🎬
आज के इस डिजिटल दौर में, जहाँ फिल्में मोबाइल की स्क्रीन और मल्टीप्लेक्स की बंद दीवारों में सिमट गई हैं... वहाँ अपना 'सिनेयुग टूरिंग टॉकीज' आज भी खुले आसमान के नीचे सिनेमा का असली जादू बिखेर रहा है! ✨
यह सिर्फ एक टॉकीज नहीं, बल्कि 90 के दशक के उस दौर की याद है, जहाँ सिनेमा एक उत्सव हुआ करता था। 🥳
आखिर मै इसे आज भी क्यों चला रहा हू...? 🤔

* 90s के दर्शकों का सच्चा प्यार: उस दौर की सीटियों की गूंज, तालियों की गड़गड़ाहट और दर्शकों का वो निश्छल प्यार ही "सिनेयुग" कीं असली ताकत है।
* यादों का कारवां: तंबू के नीचे, अपनों के बीच बैठकर फिल्म देखने का जो सुकून है, वो दुनिया के किसी कोने में नहीं मिल सकता।
* परंपरा का सम्मान: हम सिनेमा के उस स्वर्णिम इतिहास और संस्कृति को जिंदा रख रहे हैं, जिसने हम सबको हंसना और रोना सिखाया।

मल्टीप्लेक्स की चमक-दमक अपनी जगह है, लेकिन तंबू के पर्दे पर जब प्रोजेक्टर की रोशनी पड़ती है, तो दिल आज भी बोल उठता है— सिनेमा तो यहीं है! 📽️🍿
आप सभी दर्शकों के इसी अटूट प्यार और साथ के लिए "सिनेयुग टूरिंग टॉकीज"परिवार आपका दिल से आभार व्यक्त करता है। हमारे इस सफर में यूं ही हमारे साथ बने रहिए। 🙏🍿
📌 आपकी क्या यादें हैं टूरिंग टॉकीज से? नीचे कमेंट में हमारे साथ जरूर शेयर करें! 👇


सभी साथीयो को अनेक अनेक धन्यवाद💖🙏 आज अपने पेज कें 500 फॉलोवर पुरे हो चुके l ऐसाही साथ बनाकर राखिये आपकी हर प्रेरणा "न्यू...
10/05/2026

सभी साथीयो को अनेक अनेक धन्यवाद💖🙏 आज अपने पेज कें 500 फॉलोवर पुरे हो चुके l
ऐसाही साथ बनाकर राखिये आपकी हर प्रेरणा "न्यू सिनेयुग टुरिंग टॉकीज" को और बेहतर बनाने मे मददगार रहेगी...!

आज बात होगी "तुझे मेरी कसम" कीं...इस फिल्म को लेकर दर्शकों का क्रेज न केवल इसकी रिलीज के समय जबरदस्त था, बल्कि आज भी बरकरार है। यह रितेश देशमुख और जेनेलिया डिसूजा की डेब्यू फिल्म थी, जिसने अपनी सादगी और संगीत से लोगों का दिल जीत लिया था।
आप सभी अपनी यांदे कॉमेंट मे जरूर शेअर करे l
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दादा कोंडके कें फिल्मों की सफलता में टूरिंग टॉकीज का बहुत बड़ा योगदान था. और आज भी हैं !क्योंकि वे दूर इलाकों तक कल भी प...
09/05/2026

दादा कोंडके कें फिल्मों की सफलता में टूरिंग टॉकीज का बहुत बड़ा योगदान था. और आज भी हैं !क्योंकि वे दूर इलाकों तक कल भी पहुँचती थीं और आज भी..। इसी कारण दादा कोंडके और महाराष्ट्र की टूरिंग टॉकीज का रिश्ता बेहद गहरा रहा है। इस्का पुखता सबूत हैं आज पोस्ट कीं गई येह दिल 💖को छू जानेवाली येह प्यारी तस्वीर...
आप सभी ने दादा कीं कोनसी फिल्म टुरिंग टॉकीज मे देखी कॉमेंट मे जरूर बतायें l
पेज को फॉलो और शेअर जरूर करे 🙏🙏

वैसे तो आप सभी जाणते हैं सिनेयुग टुरिंग टॉकीज खास 90s कें दर्शको कें लिये चलाया जाता हैं...!इसी कारण "करण-अर्जुन" को हाल...
08/05/2026

वैसे तो आप सभी जाणते हैं सिनेयुग टुरिंग टॉकीज खास 90s कें दर्शको कें लिये चलाया जाता हैं...!
इसी कारण "करण-अर्जुन" को हाल हीं मै सिनेयुग टुरिंग टॉकीज कें सुपर स्क्रीन पर्दे पर फिर से प्रदर्शित होना पुराने दर्शकों के लिए केवल एक फिल्म देखना नहीं, बल्कि अपनी यादों को दोबारा जीने जैसा है।

* बचपन की यादें (Nostalgia): कई पुराने दर्शकों के लिए यह फिल्म उनके बचपन या जवानी के सुनहरे दिनों की याद दिलाती है। सिनेयुग टुरिंग टॉकीज में फिल्म देखने पहुंचे दर्शकों का कहना है कि उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे वे पहली बार यह फिल्म देख रहे हैं।
* आइकोनिक डायलॉग्स पर उत्साह: जब पर्दे पर राखी गुलज़ार "मेरे करण अर्जुन आएंगे" कहती हैं, तो पूरा थिएटर तालियों और सीटियों से गूंज उठता है। यह डायलॉग आज भी दर्शकों के बीच उतना ही लोकप्रिय है जितना तीन दशक पहले था।
* शाहरुख-सलमान की जोड़ी का क्रेज: फिल्म के माध्यम से शाहरुख खान और सलमान खान को पहली बार एक साथ पर्दे पर देखने का जो रोमांच 90 के दशक में था, वह आज भी बरकरार है। पुराने दर्शकों के लिए इन दो सुपरस्टार्स को एक साथ 'एक्शन' मोड में देखना किसी उत्सव से कम नहीं है।
* तकनीकी अनुभव: इस बार फिल्म को 5.1 डॉल्बी मास्टर साउंड और बेहतर विजुअल क्वालिटी के साथ री-मास्टर किया गया है। पुराने दर्शकों के लिए यह एक नया अनुभव है जहाँ वे अपने पसंदीदा गानों जैसे "ये बंधन तो" और "भंगड़ा पाले" को बेहतरीन साउंड क्वालिटी में सुन पा रहे हैं।

कुल मिलाकर, करण अर्जुन की वापसी ने यह साबित कर दिया है कि क्लासिक फिल्मों का जादू समय के साथ कम नहीं होता, बल्कि और गहरा हो जाता है। आप सभी "करण अर्जुन" कीं अपनी यांदे जरूर शेअर करे l पेज को शेअर, फोल्लो जरूर करे🙏🙏 l

हिंदविजय टुरिंग टॉकीज कीं 2023 कीं मंठा जि. जालना (महाराष्ट्र ) कीं तस्वीरे, यहा लगभग 2 महिने तक सिनेमा कॅम्प चला l    प...
08/05/2026

हिंदविजय टुरिंग टॉकीज कीं 2023 कीं मंठा जि. जालना (महाराष्ट्र ) कीं तस्वीरे, यहा लगभग 2 महिने तक सिनेमा कॅम्प चला l
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06/05/2026

भगवान गवळी पेंटर जो अपना काम "भगवान सिने आर्टस् " कें नाम सें करते थे l जवळा बाजार गाव मे उनको सिनेमा पेंटर कें रूप सें एक नई पहचान मिली जो पहचान आज भी बरकरार हैं l आज कें दौर मे भी भगवान पेंटर सिनेयुग टुरिंग टॉकीज मे रंग भरते हैं,..... "अपनी कला सें ".... l
टुरिंग टॉकीज के पेंटरों का काम सिर्फ कला नहीं, बल्कि सिनेमा की रूह को तंबू के नीचे उतारने का एक जुनूनी तरीका था।
अपनी कला से उस दौर में लोगों का खास मनोरंजन किया इनके जैसे कुछ खास पेंटरो ने,जब सिनेमा खुद अपनी पहचान तलाश रहा था। उनकी कला में मेहनत, सादगी और सिनेमा के प्रति बेपनाह प्यार झलकता था।
आप सभी कीं इन कलाकारो प्रति रही भावनाये कॉमेंट मे बतायें l
पेज को फोल्लो और शेअर जरूर करे 🙏🙏🙏

महाराष्ट्र की मिट्टी से उपजा 'टुरिंग टॉकीज' (Touring Talkies) का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। यह सिर्फ सिनेमा नह...
05/05/2026

महाराष्ट्र की मिट्टी से उपजा 'टुरिंग टॉकीज' (Touring Talkies) का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। यह सिर्फ सिनेमा नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता उत्सव है। आइए, इसके रोमांच और दर्शकों के उस 'क्रेज' को करीब से देखते हैं:
1. गांव का 'लाल किला' (तंबू का सिनेमा)
जब गांव के खाली मैदान में बड़े-बड़े तंबू (Tent) गाड़ने शुरू होते थे, तो समझो दिवाली आ गई। लाल रंग के इन तंबुओं के अंदर मिट्टी पर बैठकर फिल्में देखना एक अलग ही रोमांच था। आज के मल्टिप्लेक्स की 'रिक्लाइनर' कुर्सियों में वो मजा कहां, जो जमीन पर पालथी मारकर बैठने और अपनों के साथ सीटी बजाने में आता था।
2. ढोल-ताशों के साथ 'फिल्म का विज्ञापन'
टुरिंग टॉकीज की मार्केटिंग का अंदाज सबसे निराला था। एक जीप या बैलगाड़ी पर फिल्म के बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर पूरे गांव में घुमाया जाता था। साथ में लाउडस्पीकर पर बजते गाने और हाथ से फेंके जाने वाले रंग-बिरंगे पर्चे (Pamphlets) बच्चों के बीच लूट मचा देते थे। यह शोर ही फिल्म के 'हाउसफुल' होने की गारंटी होता था।
3. प्रोजेक्टर की जादुई रोशनी
सफेद पर्दे पर जब प्रोजेक्टर की तेज रोशनी पड़ती और धूल के कणों के बीच से 'रील' घूमती हुई दिखती, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। फिल्म की रील बीच में टूट जाना या बिजली चले जाना आम बात थी, लेकिन दर्शक नाराज होने के बजाय 'वन्स मोर' के नारे लगाते और ऑपरेटर के फिल्म ठीक करने का बेसब्री से इंतजार करते।
4. जतारा (मेले) की जान
महाराष्ट्र की 'जतारा' (मेला) टुरिंग टॉकीज के बिना अधूरी मानी जाती थी। लोग कोसों दूर से बैलगाड़ियों में खाना बांधकर सिर्फ फिल्म देखने आते थे। फिल्म देखते हुए घर का लाया हुआ 'पिठलं-भाकरी' खाना एक सामूहिक पिकनिक जैसा अहसास देता था।
5. दर्शकों का क्रेज: सीटी, सिक्के और आंसू

* सिक्कों की बारिश: जब पर्दे पर हीरो की एंट्री होती या कोई धमाकेदार गाना आता, तो तंबू में सिक्कों की बारिश हो जाती थी।
* भावुक जुड़ाव: अगर फिल्म दुखद होती, तो पूरा तंबू सुबकियों से भर जाता। दर्शक फिल्म को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हकीकत मानकर जीते थे।
* मन्नतें: कई बार तो लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर टुरिंग टॉकीज में फिल्म का शो प्रायोजित (Sponsor) करते थे।

6. डिजिटल दौर में भी जिंदा है रूह
आज नेटफ्लिक्स और यूट्यूब के दौर में भी हिंगोली, बुलढाणा, जालना, बीड, यवतमाळ जैसे दूरदराज के इलाकों या बड़े मेलों में टुरिंग टॉकीज अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। हालांकि अब रील की जगह डिजिटल प्रोजेक्टर आ गए हैं, लेकिन उस तंबू की महक और दर्शकों का वो शोर आज भी पुरानी यादों को ताजा कर देता है।
टुरिंग टॉकीज सिर्फ एक पर्दा नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों की 'सपनों की दुनिया' थी, जिनके पास सिनेमा हॉल जाने के पैसे या साधन नहीं थे।
क्या आप जानना चाहेंगे कि महाराष्ट्र के किन प्रमुख मेलों में आज भी टुरिंग टॉकीज का लुत्फ उठाया जा सकता है?
आपकी राय कॉमेंट मे जरूर शेअर करे पेज को फॉलो करे 🙏🙏

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