05/04/2020
90 साल की दादी जी ने दिया संदेश ✨ संकट की घड़ी में दीया मोमबत्ती जलाने का क्या हैं महत्व? ✨
दीया बत्ती जलाकर सिर्फ उत्सव ही नहीं मनाया जाता.. प्रार्थना भी की जाती है, किसीको श्रद्धांजलि भी दी जाती हैं मन में शुभभावना-शुभकामना के दीप जलाकर शुभ संकल्पों की शक्ति को सारे संसार में फैलाया भी जा सकता है। 5 अप्रैल रविवार रात्रि 9:00 बजे 9 मिनट के समय में दीया बत्ती के साथ-साथ मन की शक्ति का विशेष प्रयोग होगा! ऐसे शुभ कार्य में जब पूरा देश एक साथ एक समय पर, एक संकल्प के साथ खड़ा होगा और अपना सहयोग देगा.. तब किसी भी संकट या फिर विघ्न को मिटाना संभव होगा! ऐसी क्रिया अापने दीपावली के त्योहार पर देखी होगी। यदि आज की तारीख में कोई त्यौहार नहीं है तो निश्चित ही यह प्रार्थना का समय हैं। यह दुविधा सिर्फ भारत में नहीं पूरे विश्व में हैं। हजारों लोगों की मृत्यु और लाखो संक्रमित लोगों का परिवार दुःख का रोना रो रहे हैं और उनसे प्रभावित करोड़ों लोग भयभीत हैं, ऐसे समय पर इस भय के वातावरण को मिटाना जरूरी है! इसलिए यह अवसर मिला है तो इसे गंवाना नहीं हैं, अगर यह प्रयोग सफल होगा तो इसका असर पूरे विश्व में दिखाई देगा, पूरा विश्व भारत का ही गुण गाएगा! क्योंकि भारत सभी देशों में महान देश है यहां समस्याएं तो आएगी पर समय प्रति समय समाधान भी निकलेगा बस आपको अपना योगदान देना होगा! यह समय चक्र बलवान है, कल्याणकारी है हर बात में कल्याण समाया हुआ है। वर्तमान में एक तरफ मानव जीवन मुश्किल घड़ी में जीवन व्याप्त कर रहा है तो दूसरी तरफ प्रकृति शुद्ध होती जा रही क्योंकि प्रकृति को जो दोगे प्रकृति से वही मिलेगा इसलिए प्रार्थना सब के कल्याण के लिए ही नहीं स्वयं के कल्याण के लिए भी करनी है साथ ही साथ प्रकृति से और परमात्मा से भी खुद से हुई गलतियां और पाप कर्मों के लिए भी क्षमा मांगनी हैं, तभी यह कार्य सार्थक होगा और भय के अंधकार में उम्मीदों का प्रकाश उजागर होगा, मन शक्तिशाली होगा, पहाढ़ जैसी कोरोना वाली समस्या भी राई की तरह अनुभव होगी और तब लढ़ना आसान होगा और हमारी जीत होगी।
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Report Ritesh kushwaha
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