12/05/2021
*नदी में लोग शवों को फेंकने पर मजबूर...और कुत्ते चील गिद्ध मछलियां लाशों को नोचकर खाने पर मजबूर... सरकार हिन्दू मुस्लिम करने में मसरूफ़...*
खबर आप तक- उ प्र/हक़ के वास्ते (अखबार)/ सदा ए बुलंद-(मेगज़ीन)
यमुना गंगा नदी की ऐसी हालत है,कि यहां सैकड़ों लाशें उ. प्र. से बहकर बिहार तरफ जाने पर अफरातफरी मच गयी हैं। एक दो नहीं सैकड़ों की संख्या है। दोनों राज्यों में नकारा जा रहा है कि ये लाशें उ. प्र. और उ प्र कह रहा है बिहार की तरफ से आई हैं। इतना दर्द नाक मंज़र न देखा था और शायद ही आगे देखने को मिले।,वजह ये बताई जा रही है कि हिन्दू धर्म में अपने परिजनों की मौत होने पर इतना रूपया नहीं है कि मृतकों का किर्याकर्म किया जा सके । वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि मुझसे 30,000-50,000 हजार रुपए मांगे जा रहे हैं।हम कहां से लाएंगे।जो भी कुछ था वह इलाज में लगा दिया। बड़ी शौक़ और अफसोस की बात है कि, प्रधानमंत्री जब वोट मांगते हैं तो गंगा के लाल बन जाते हैं।आज गंगा में लाशों का ढेर लगा हुआ है।तो सरकार को गंगे माता के लाल को नहीं दिख रहा है।ऐसा दुर्दशाजनक और शर्मसार दृश्य जिसने मानवता और इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। कि नदी में शव ऐसे सड़े और फूले पड़े हुए हैं, जिन्हें कुत्ते चील गिद्ध और मछलियां नोच खा रहीं हैं। हाय, इस हुकूमत में ये क्या देखने को मिल रहा है। महामारी,या मौत को तो कोई नहीं लाता, लेकिन सरकार इतना तो कर ही सकतीं हैं कि मरने वालों का अन्तिम संस्कार तो नसीब करा सकती है। और बिहार उत्तर प्रदेश दोनों में BJP की सरकार है। क्या हिन्दू भाइयों को अभी भी होश नहीं आ रहा है कि, हिन्दू ख़तरे में है,..का नारा लगाने वाले आज कहां है। क्या यही दिन देखने के लिए सरकार चुनीं थी। अगर आम आदमी आवाज़ उठाता है तो मुख्यमंत्री धमकी देते हैं कि व्यवस्था पर जो सवाल उठाएगा या खिलाफ बोलेगा, उसकी सम्पति जब्त कर ली जाएगी और मुकदमा कर के जेल भेजा जाएगा। और अब तो सारा देश में शर्मसार दृश्य और ध्वस्त व्यवस्था लाचार इन्तेजाम देख रहा है। सारी धाराएं जनता के लिए ही है। हुक्मरानों के लिए कुछ नहीं है।अगर सारी व्यवस्था ठीक है तो लोग अपने परिजनों की लाशों को कुत्तों चील गिद्ध को नुचवाने प्र मजबूर क्यों हो रहें हैं..? अरे जनाब,जब इंसान ही नहीं बचा तो सम्पति जब्त किसकी करोगे। जनता वोट दे सरकार को और सरकार ने साफ कर दिया है कि आत्मनिर्भर हो जाओ।आज पूरा देश आत्मनिर्भर हो गया है। संस्कार को पैसा नहीं है तो नदियों में लाशें जनता फेंक रही है। ये उन परिवारों से पूछो कोई,- जिसने अपने बाप,भाई,बहन,बेटा, बेटी,या पत्नि के शव को इस वजह से नदी में चील गिद्ध कुत्तों को नोचने के लिए फेंक दिया,कि उसके पास रूपए नहीं है। और प्रधानमंत्री मुल्क को विश्वगुरु, न्यू इंडिया, बनाने में अठारह -अठारह घंटों अपना दिमाग खपा कर कड़ी मेहनत मशक्कत से काम कर रहे हैं। गलतियां हुक्मरानों और हुकूमत की नहीं कही जा सकती,गलती तो आवाम की ही कही जायेगी, जनता ने ही तो जुमलों को भगवान मान लिया। आज उसी ने नतीजों ने हमें सांसो के लिए आक्सीजन तक का मोहताज कर दिया।
📚शेख़ मौलाना शाही ✍️