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जब उद्धव ने श्रीकृष्ण से पूछा कि द्रौपदी के चीरहरण के समय आप मौन क्यों रहे?एक बार उद्धव जी ने भगवान श्री कृष्ण से मित्रत...
04/09/2026

जब उद्धव ने श्रीकृष्ण से पूछा कि द्रौपदी के चीरहरण के समय आप मौन क्यों रहे?

एक बार उद्धव जी ने भगवान श्री कृष्ण से मित्रता, धर्म और कर्म को लेकर एक अत्यंत गंभीर प्रश्न पूछा। यह संवाद आज भी हमारे जीवन को आत्मचिंतन की प्रेरणा देता है।

उद्धव जी ने पूछा कि हे कृष्ण! आप तो अंतर्यामी हैं। आपने ही कहा है कि सच्चा मित्र वही है जो बिना माँगे अपने मित्र की सहायता करे। फिर जब पांडव संकट में थे, तब आपने उन्हें पहले से क्यों नहीं बचाया?

आपने युधिष्ठिर को जुआ खेलने से क्यों नहीं रोका?

आपने पासे को धर्म के पक्ष में क्यों नहीं पलटा?

जब द्रौपदी को भरी सभा में अपमानित किया गया, तब भी आप तत्काल क्यों नहीं आए?

आप तब प्रकट हुए, जब दुशासन उनका चीरहरण करने लगा। इतनी देर क्यों?

भगवान श्री कृष्ण मुस्कुराए और बोले कि उद्धव, विजय उसी की होती है जो समय पर विवेक से काम लेता है।

युधिष्ठिर मुझे अपनी ओर से खेलने के लिए कह सकते थे। यदि शकुनि और मैं पासे खेलते, तो बताओ विजय किसकी होती?

उन्होंने मुझसे प्रार्थना की थी कि जब तक मुझे बुलाया न जाए, मैं सभाकक्ष में प्रवेश न करूँ। उनकी प्रार्थना का सम्मान करते हुए मैं बाहर प्रतीक्षा करता रहा। वे हारते गए, लेकिन मुझे पुकारने के बजाय भाग्य को दोष देते रहे।

उद्धव जी ने पूछा, और द्रौपदी के समय?

श्री कृष्ण बोले कि जब द्रौपदी को सभा में लाया गया, तब तक उसने मुझे नहीं पुकारा। जब उसे अपनी सामर्थ्य और सहारे पर निर्भरता व्यर्थ लगी और उसने पूर्ण विश्वास के साथ मुझे पुकारा, तब मैं उसी क्षण उसकी रक्षा के लिए उपस्थित हुआ।

अब बताओ, मेरी गलती कहाँ थी? उद्धव जी ने फिर पूछा कि क्या आप तभी सहायता करेंगे, जब कोई आपको पुकारे? क्या आप स्वयं आगे नहीं आएँगे? श्री कृष्ण ने कहा कि उद्धव, यह सृष्टि कर्म और कर्मफल के सिद्धांत पर चलती है। मैं प्रत्येक क्षण तुम्हारे साथ हूँ। मैं तुम्हारे कर्मों का साक्षी हूँ और तुम्हें विवेक प्रदान करता हूँ लेकिन तुम्हारे स्थान पर कर्म करने का अधिकार तुम्हें ही है।

उद्धव जी ने मुस्कुराकर कहा, तो क्या मनुष्य पाप करता रहे और आप केवल देखते रहें?

भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि मनुष्य पाप तब करता है, जब वह यह भूल जाता है कि मैं हर क्षण उसके साथ हूँ और उसके कर्मों का साक्षी हूँ। यदि मनुष्य को हर पल मेरी उपस्थिति का अनुभव रहे, तो क्या वह सहज ही अधर्म का मार्ग चुन पाएगा?

ईश्वर को याद रखना केवल पूजा नहीं, बल्कि अपने प्रत्येक कर्म के प्रति जागरूक रहना भी है।

हमारे जीवन में अनेक अवसर ऐसे आते हैं, जब हमें सही और गलत के बीच स्वयं निर्णय लेना होता है। ईश्वर हमें विवेक, चेतना और मार्गदर्शन देते हैं, लेकिन कर्म हमें स्वयं करना होता है।

जब हमें यह अनुभूति हो जाए कि #परमात्मा हर #क्षण हमारे साथ हैं और हमारे प्रत्येक कर्म के साक्षी हैं, तब हमारे भीतर से अधर्म का साहस और पाप की प्रवृत्ति धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है।

🙏 जय श्री राधेकृष्ण 🙏

04/09/2026

03/09/2026

     PFC (Power Factor Correction) सेक्शन में Bus Voltage (~380V से 400V DC) न बनने के मुख्य कारण और स्टेप-बाय-स्टेप चेक...
03/09/2026


PFC (Power Factor Correction) सेक्शन में Bus Voltage (~380V से 400V DC) न बनने के मुख्य कारण और स्टेप-बाय-स्टेप चेकिंग:
​1. बेसिक DC इनपुट और रेक्टिफायर
​ब्रिज रेक्टिफायर आउटपुट: चेक करें कि मेन इनपुट AC से लगभग 310V – 325V DC PFC चोक और मेन कैपेसिटर तक पहुँच रही है या नहीं।
​सॉफ्ट-स्टार्ट / इनरश रिले: चेक करें कि NTC के पैरेलल में लगी रिले ऑन हो रही है या नहीं। रिले ओपन रहने पर लोड पड़ते ही वोल्टेज ड्रॉप हो जाती है।
​2. PFC कंट्रोलर IC और VCC सप्लाई
​VCC वोल्टेज: PFC कंट्रोलर IC (जैसे UC3854, L6562, UCC28019 आदि) की VCC पिन पर 12V से 15V DC आ रही है या नहीं।
​ड्राइवर सिग्नल: अगर VCC सही है, तो IC की आउटपुट पिन से गेट ड्राइव पल्स निकल रही है या नहीं (मल्टीमीटर पर Hz/AC मोड या ऑसिलोस्कोप से जांचें)।
​3. स्विचिंग और पावर कंपोनेंट्स (हीटसिंक एरिया)
​PFC MOSFET / IGBT: हीटसिंक पर लगे स्विचिंग ट्रांजिस्टर (जैसे G4PF... / FDA...) को चेक करें। अगर यह शॉर्ट होगा तो फ्यूज उड़ेगा; अगर गेट सिग्नल ब्रेक है तो यह स्विच नहीं करेगा।
​गेट ड्राइव रेसिस्टर्स: गेट पिन पर लगी 10Ω से 47Ω की रेजिस्टेंस और साथ में लगा 1N4148 डायोड ओपन तो नहीं है।
​PFC बूस्ट डायोड: फास्ट रिकवरी डायोड (जैसे RHRP3060 या अल्ट्रा-फास्ट डायोड) को चेक करें कि वह ओपन तो नहीं हो गया।
​4. फीडबैक और सेंसिंग सर्किट (सबसे आम फॉल्ट)
​वोल्टेज डिवाइडर नेटवर्क: बस वोल्टेज को सेंस करने के लिए IC पर हाई-वैल्यू रेसिस्टर्स (100kΩ, 470kΩ, 1MΩ) की सीरीज लगी होती है। अगर इनमें से कोई भी रेसिस्टर ओपन या वैल्यू शिफ्ट हो जाए, तो IC शटडाउन (OVP/UVP) में चली जाती है।
​करंट सेंस शंट रेसिस्टर: सोर्स/एमिटर पर लगी लो-वैल्यू रेजिस्टेंस (0.05Ω – 0.22Ω) जलने या ओपन होने पर भी बूस्टिंग नहीं होती।
​5. PCB ट्रैक्स और जंपर्स (तस्वीर 2 के अनुसार)
​नीचे के PCB में जहाँ जम्पर वायर लगे हैं और सोल्डरिंग हुई है, वहां ट्रैक की कंटीन्यूटी (Continuity) चेक करें। हाई-करंट ट्रैक्स ड्राई-सोल्डर या कट होने पर PFC एक्टिव नहीं होता।
​मेन कैपेसिटर पर अभी कितनी DC वोल्टेज मिल रही है (0V या केवल 300V-320V)?

03/09/2026

 #विवेकानंद कहा करते थे, एक सिंहनी गर्भवती थी। वह छलांग लगाती थी एक टीले पर से। छलांग के झटके में उसका बच्चा गर्भ से गिर...
03/09/2026

#विवेकानंद कहा करते थे, एक सिंहनी गर्भवती थी। वह छलांग लगाती थी एक टीले पर से। छलांग के झटके में उसका बच्चा गर्भ से गिर गया, गर्भपात हो गया।

वह तो छलांग लगा कर चली भी गई, लेकिन नीचे से भेड़ों का एक झुंड निकलता था, वह बच्चा भेड़ों में गिर गया। वह बच्चा बच गया। वह भेड़ों में बड़ा हुआ। वह भेड़ों जैसा ही रिरियाता, मिमियाता। वह भेड़ों के बीच ही सरक—सरक कर, घिसट—घिसट कर चलता। उसने भेड़—चाल सीख ली।

और कोई उपाय भी न था, क्योंकि बच्चे तो अनुकरण से सीखते हैं। जिनको उसने अपने आस—पास देखा, उन्हीं से उसने अपने जीवन का अर्थ भी समझा, यही मैं हूं। और तो और, आदमी भी कुछ नहीं करता।

वह तो सिंह—शावक था, वह तो क्या करता? उसने यही जाना कि मैं भेड़ हूं। अपने को तो सीधा देखने का कोई उपाय नहीं था; दूसरों को देखता था अपने चारों तरफ, वैसी ही उसकी मान्यता बन गई कि मैं भेड़ हूं।

वह भेड़ों जैसा डरता। और भेड़ें भी उससे राजी हो गईं; उन्हीं में बड़ा हुआ, तो भेड़ों ने कभी उसकी चिंता नहीं ली। भेड़ें भी उसे भेड़ ही मानतीं।

ऐसे वर्षों बीत गये। वह सिंह बहुत बड़ा हो गया, वह भेड़ों से बहुत ऊपर उठ गया। उसका बड़ा विराट शरीर, लेकिन फिर भी वह चलता भेड़ों के झुंड में। और जरा—सी घबड़ाहट की हालत होती, तो भेड़ें भागतीं, वह भी भागता। उसने कभी जाना ही नहीं कि वह सिंह है। था तो सिंह, लेकिन भूल गया। सिंह से ‘न होने’ का तो कोई उपाय न था, लेकिन विस्मृति हो गई।

फिर एक दिन ऐसा हुआ कि एक बूढ़े सिंह ने हमला किया भेड़ों के उस झुंड पर। वह बूढ़ा सिंह तो चौंक गया, वह तो विश्वास ही न कर सका कि एक जवान सिंह, सुंदर, बलशाली, भेड़ों के बीच घसर—पसर भागा जा रहा है।

और भेड़ें उससे घबड़ा नहीं रहीं। और इस के सिंह को देखकर सब भागे, बेतहाशा भागे, रोते—चिल्लाते भागे। इस बूढ़े सिंह को भूख लगी थी, लेकिन भूख भूल गई।

इसे तो यह चमत्कार समझ में न आया कि यह हो क्या रहा है? ऐसा तो कभी न सुना, न आंखों देखा। न कानों सुना, न आंखों देखा; यह हुआ क्या?

वह भागा। उसने भेड़ों की तो फिक्र छोड़ दी, वह सिंह को पकड़ने भागा। बामुश्किल पकड़ पाया; क्योंकि था तो वह भी सिंह; भागता तो सिंह की चाल से था, समझा अपने को भेड़ था। और यह बूढ़ा सिंह था, वह जवान सिंह था। बामुश्किल से पकड़ पाया।
जब पकड़ लिया, तो वह रिरियाने लगा, मिमियाने लगा। सिंह ने कहा, अबे चुप! एक सीमा होती है किसी बात की। यह तू कर क्या रहा है? यह तू धोखा किसको दे रहा है?

वह तो घिसट कर भागने लगा। वह तो कहने लगा, क्षमा करो महाराज, मुझे जाने दो! लेकिन वह बूढ़ा सिंह माना नहीं, उसे घसीट कर ले गया नदी के किनारे। नदी के शांत जल में, उसने कहा जरा झांक कर देख।

दोनों ने झांका। उस युवा सिंह ने देखा कि मेरा चेहरा और इस बूढ़े सिंह का चेहरा तो बिलकुल एक जैसा है।

बस एक क्षण में क्रांति घट गई। ‘कोई औषधि नहीं!’ हुंकार निकल गई, गर्जना निकल गई, पहाड़ कंप गये आसपास के! कुछ कहने की जरूरत न रही।

कुछ उसे बूढ़े सिंह ने कहा भी नहीं—सदगुरु रहा होगा! दिखा दिया, दर्शन करा दिया। जैसे ही पानी में झलक देखी, हम तो दोनों एक जैसे हैं।

बात भूल गई। वह जो वर्षों तक भेड़ की धारणा थी, वह एक क्षण में टूट गई। उदघोषणा करनी न पड़ी, उदघोषणा हो गई। हुंकार निकल गया। क्रांति घट गई...

सदगुरु के सत्संग का इतना ही अर्थ होता है कि वह तुम्हें घसीट कर वहां ले जाये, जहां तुम उसके चेहरे और अपने चेहरे को मिला कर देख पाओ, जहां तुम उसके भीतर के अंतरतम को, अपने अंतरतम के साथ मिला कर देख पाओ। गर्जना हो जाती है, एक क्षण में हो जाती है।

सत्संग का अर्थ ही यही है कि किसी ऐसे व्यक्ति के पास बैठना, उठना, जिसे अपने स्वरूप का बोध हो गया है; शायद उसके पास बैठते—बैठते संक्रामक हो जाये बात; शायद उसकी मौजूदगी में उसकी आंखों में, उसके इशारों में तुम्हारे भीतर सोया हुआ सिंह जाग जाये।

ओशो; अष्टावक्र महागीता

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02/09/2026

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हार्वर्ड की प्रोफेसर का कहना है कि टेक दिग्गज दुनिया को "इंसानों की फ़ैक्टरी फ़ार्मिंग" की ओर धकेल रहे हैं।​द न्यूयॉर्क ...
28/08/2026

हार्वर्ड की प्रोफेसर का कहना है कि टेक दिग्गज दुनिया को "इंसानों की फ़ैक्टरी फ़ार्मिंग" की ओर धकेल रहे हैं।
​द न्यूयॉर्क टाइम्स के पॉडकास्ट "हार्ड फोर्क" पर बात करते हुए, जिल लेपोर (Jill Lepore) का तर्क है कि कॉरपोरेट्स का यह बढ़ता नियंत्रण "इंसानों की फ़ैक्टरी फ़ार्मिंग" के समान है—एक ऐसी व्यवस्था जिसे लोगों को छांटने, बांटने और अलग-थलग करने के लिए बनाया गया है, जिससे उनकी स्वायत्तता (autonomy) पूरी तरह छिन जाती है।
​लेपोर बताती हैं कि टेक जगत के शीर्ष लोग जानबूझकर एक ऐसा भविष्य तैयार कर रहे हैं जहाँ सामाजिक और नीतिगत फ़ैसले चुने हुए प्रतिनिधियों के बजाय निजी कंपनियों की मशीनों द्वारा तय किए जाएंगे।
​अपनी पुस्तक "द राइज़ एंड फ़ॉल ऑफ़ द आर्टिफिशियल स्टेट" में लेपोर इस बात पर ज़ोर देती हैं कि जिस तरह औद्योगिक कृषि के दौर में इंसान जानवरों को नियंत्रित करने लगा था, ठीक उसी तरह आज #इंसान #मशीनों के अधीन होता जा रहा है। जनता की वास्तविक इच्छाओं—जो अक्सर AI और डेटा सेंटरों के अनियंत्रित विस्तार का विरोध करती हैं—को सुनने के बजाय, अरबपति तकनीकी अभिजात वर्ग (technocrats) मतदाताओं द्वारा संचालित लोकतांत्रिक व्यवस्था को हटाकर एल्गोरिदम-आधारित शासन (algorithmic governance) थोपने में लगे हैं।
​यह बदलाव मानव समुदाय और स्वशासन के लिए एक गंभीर ख़तरा है, जो सार्वजनिक जीवन को महज़ व्यावसायिक लेन-देन तक सीमित कर देता है जहाँ आम सहमति को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

26/08/2026

महाभारत ...

अर्जुन को कभी राजा नहीं बनना था, युधिष्ठिर के बाद युवराज भी भीमसेन थे. अर्जुन केवल योद्धा था. उसकी कोई महत्वकांक्षा नहीं थी, लेकिन #प्रकृति सर्वश्रेष्ठ जीन का #चुनाव करती है, इसलिए अर्जुन के वंश का परीक्षित ही राजा बना.
#महाभारत

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