21/01/2026
युगों-युगों से चली आ रही यह परंपरा है कि जब आप सफ़ल और नामचीन बन जाते हैं तो आपके चाहने वाले और आपसे नफ़रत करने वालों दोनों प्रकार के लोग आपके जीवन में दखल-अंदाजी करने लगते हैं । हाँ ! जहाँ तक बात चाहने वालों की बात है तो उनके दखल-अंदाजी को तो हम नज़र-अंदाज़ कर सकते हैं लेकिन जब नफ़रत करने वाले आपके जीवन में जहर घोलने का प्रयास करते हैं तो यह समझ नहीं आता कि उनका कैसे सामना किया जाए, उन्हें कैसे मुँहतोड़ जवाब दिया जाए । आज के इस किशोर कुमार स्पेशल पोस्ट में हम उनके जीवन से जुड़ा एक ऐसा ही किस्सा आप सब के साथ बाँटने जा रहें हैं जब किशोर दा के एक लाइव शो को बम से उड़ाने की धमकी दी गई ? साथ ही जानेंगे कि यह धमकी कहाँ और किसने दी थी ? जब यह धमकी अखबारों में छपी तो इस पर पुलिस की क्या प्रतिक्रिया रही थी ? किशोर कुमार जब उस लाइव शो में गए तो ऐसा क्या हुआ कि पुलिस को उनके चारों तरफ सुरक्षा घेरा बनाना पड़ा ताकि कोई भी आतंकी उन तक ना पहुँच सके ? किशोर दा के किस हरकत को देखकर स्टेज पर मौजूद लता मंगेशकर ने कहा कि आप हम सब की सुरक्षा को दांव पर लगा रहे हैं ! ऐसे ही कई दिलचस्प बातों को जानने के लिए पोस्ट के अंत तक बने रहिए ।
दरअसल यह पूरी घटना किशोर कुमार के एक ऐसे लाइव शो की है जिसे कनाडा में आयोजित किया गया था । कार्यक्रम के कुछ ही दिन पूर्व जब शो के आयोजकों ने घोषणा किया कि फलाँ तारीख को किशोर दा का एक लाइव शो रखा गया हैं । कनाडा में रहने वाले हिंदी गानों और फ़िल्मों के शौकीन सभी लोगों के लिए यह एक बड़ी ख़ुशीखबरी थी लेकिन यह खुशख़बरी अगले ही दिन चिंता में तब बदल गई जब एक आतंकवादी संगठन ने इस शो का विरोध किया और कहा कि अगर यह शो आयोजित हुआ तो पूरे ऑडिटोरियम को बम से उड़ा दिया जाएगा । यहाँ आपको मैं उस आतंवादी संगठन का नाम सीधे तो नहीं बता सकता पर इतना तो आप समझ ही गए होंगे कि 70 और 80 के दशक में कौन सा आतंवादी संगठन कनाडा में सक्रिय था । ख़ैर ! अगर आप समझ गए हों तो उसका नाम कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएँ । बहरहाल ! उस धमकी ने कनेडियन और भारतीय अखबारों को ख़ूब मसाला दिया । तरह-तरह की बातें अखबारों के मुख्य पृष्ठ की सुर्खियाँ बनी । किशोर कुमार के चाहने वाले और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें चेताया कि आप कनाडा ना जाए, पर किशोर कुमार तो किशोर कुमार थे एकदम अक्खड़, जिद्दी और लापरवाह ! उन्हें भला इस धमकी की क्या चिंता थी । उन्होंने शो के आयोजकों से कहा कि आप बेधड़क शो के टिकट्स बेचो, किशोर कुमार हर हाल में वहाँ मौजूद होगा । आयोजकों ने यह सुनकर दाँतों तले उँगली दबा ली, उन्हें कोई पहला ऐसा फ़िल्म स्टार मिला था जिस पर इन धमकियों का कोई असर पड़ता ही नहीं दिख रहा था । ख़ैर ! उन आयोजकों ने इस धमकी के संबंध में कनेडियन पुलिस के आला अधिकारियों से बातचीत की । उन अधिकारियों ने कहा कि आप तनिक भी चिंता ना करें हम इस धमकी को काफी गंभीरता से ले रहे हैं ।
आखिरकार वो दिन भी आ गया जिस दिन शो होना था । नियत समय पर किशोर कुमार अपने दल-बल के साथ पहुँचे । एयरपोर्ट से लेकर ऑडिटोरियम तक सुरक्षाकर्मियों का एक भारी जत्था उन्हें मधुमक्खियों की तरह घेरे हुए चल रहा था । ऐसा कुछ माहौल ऑडिटोरियम का भी था, वहाँ पर चप्पे-चप्पे में हथियारबंद सुरक्षाकर्मी मुस्तैद थे, माहौल बहुत तनावपूर्ण होता जा रहा था । हर किसी को गेट पर मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ रहा था और ऑडिटोरियम में जाने से पहले अच्छी तरह से उनकी जाँच पड़ताल हो रही थी । यहाँ तक कि कोक के टीन वाले डब्बे और सिगरेट लाईटर भी ले जाने की सख्त मनाही थी । इस तनावपूर्ण माहौल में भी दर्शकों का उत्साह कम नहीं था कुछ ही देर बाद आखिरकार वो समय भी आ गया जब किशोर दा स्टेज पर जाने वाले थे । ऐसे में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने किशोर दा से बैकस्टेज मुलाकात की और उन्हें सलाह दिया कि वे दर्शकों को उतेजित करने वाले डांसिंग सॉग्स न गाए नहीं तो उन्हें संभालना हम सुरक्षाकर्मियों के मुश्किल हो जाएगा । इसके जगह पर आप अपने उन भावपूर्ण गानों को गाएँ जिससे दर्शक बँध जाए और अनियंत्रित न हों । लेकिन ऐसा कोई पैदा ही नहीं हुआ था जो किशोर दा को आदेश दे सके या फिर उन्हें अपने अनुसार काम करने के लिए मजबूर कर सके । उन्होंने उस पुलिस अधिकारी की बात को सुना जरूर पर नजरअंदाज कर दिया और स्टेज पर जा पहुँचे । स्टेज पर पहुँचते ही जो पहली बात उन्होंने कहा उसने सुरक्षाकर्मियों के बीच बिना बम-विस्फोट के ही खलबली मचा दी । उनका घोषणा था कि मुझे दर्शकों के बीच के कुछ ऐसे ऊर्जावान नवयुवक चाहिए जो हमारे साथ स्टेज में नाच सकें । अभी कोई नवयुवक उन तक पहुँचता इससे पहले ही सुरक्षाकर्मी हरकत में आ गए और स्टेज पर चारों तरफ तुरंत ही एक सुरक्षा घेरा डाल दिया ताकि कोई भी उन तक ना पहुँच सके । मौके पर उपस्थित सुरक्षकर्मियों के शीर्ष अधिकारियों ने किशोर दा को अपनी विवशता बताई और कहा कि "हम दर्शकों से किसी को भी आपके करीब आने की अनुमति नहीं दे सकते, आप हमारी भी मजबूरी समझें" । किशोर दा के साथ स्टेज में खड़ी लता मंगेशकर ने भी उनसे यही निवेदन किया कि आप मौके की नज़ाकत को समझे, इससे आप हम सब की सुरक्षा को दांव पर लगा देंगे । पर किशोर दा तो किशोर दा थे बिल्कुल धुन के पक्के । उन्होंने एक बार फिर से माइक लेकर घोषणा किया कि "ये सुरक्षा अधिकारी मेरे दर्शक बंधुओं को मंच पर आने से रोक रहे हैं क्योंकि इनका कहना है कि इससे मेरे जान को खतरा है । लेकिन, आप ही बताएँ कि कोई मुझे क्यों मारना चाहेगा ? मैं तो केवल एक कलाकार हूँ और आप सभी को खुश करने के लिए यहाँ आया हूँ । किसी को भी इस पर आपत्ति क्यों होगी ? मैं यह बिल्कुल मानने को तैयार नहीं हूँ कि आप में से कोई भी मेरी जान को इसलिए लेना चाहेगा क्योंकि मैं लोगों के बीच आनंद और खुशी फैलाता हूँ । ख़ैर ! इस मंच से मैं सभी सुरक्षकर्मियों को आग्रह करता हूँ कि मेरे दर्शकों को मंच पर आने दिया जाए नहीं तो इन शो में मैं नहीं गाऊँगा । इतना कहकर वो मंच पर ही धरने पर बैठ गए । उस दिन को याद करते हुए किशोर दा की चौथी पत्नी लीना चंदावरकर कहती हैं कि किशोर दा की इन बातों को सुनकर हम सब हतप्रभ थे क्योंकि यह हम सभी के लिए एक अजीब क्षण था । बहरहाल ! इस मुद्दे को हल करने के लिए आयोजकों और सुरक्षकर्मियों के आला अधिकारियों को तक़रीबन एक घंटे का समय लगा । अंत में यह निर्णय लिया गया कि सुरक्षाकर्मी केवल 10 नवयुवकों को स्टेज पर भेजेंगे वो भी अच्छी तरह तलाशी के बाद । ख़ैर ! किशोर दा की माँग सर आँखों पर रखा गया तब कहीं जाकर शो शुरू हो सका । दर्शक उनके साथ घंटों तक स्टेज पर नाचते-गाते और गुलटियाँ मारते रहे जबकि कनेडियन पुलिस दूर खड़ी होकर सब कुछ खामोशी से देखती रही । उस रात ऐसी कोई भी अनहोनी नहीं हुई जिसकी शंका थी । कनेडियन पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने सचमुच ऐसा सुरक्षा जाल बिछाया था जिसे कोई भी आतंकी पार न कर सका । उस रात दर्शकों को घंटों तक झुमाने के बाद किशोर दा ने जाते-जाते एक ऐसा गीत गाया जिसे सुनकर दर्शकों की आँखें आँसुओं से भर गईं । यह गीत था फ़िल्म हम सब उस्ताद है का प्यार बाँटते चलो, क्या हिन्दू क्या मुसलमां हम सब हैं भाई-भाई !