NARD Archives

NARD Archives Created by Anurag Suryavanshi
Presented by NARD Archives

Exploring the Past. Understanding the Present.

NARD Archives is a cinematic documentary project dedicated to uncovering the untold stories of history, cinema, culture, and the remarkable events that shaped our world. From the birth of Indian cinema and forgotten historical figures to ancient civilizations, rare archives, mysteries, and cultural heritage, every story is presented through deep research, original storytelling, and immersive docum

entary filmmaking. What You'll Find Here:

• Indian History
• Cinema History
• Bollywood Origins
• Forgotten Stories
• Historical Mysteries
• Rare Facts & Archives
• Documentary Films
• Cultural Heritage

Every documentary is carefully researched and crafted to bring the past back to life.

21/06/2026

बॉम्बे, आधी रात... वो चुपके से घर से निकल पड़ा | The Untold Story of Dadasaheb Phalke

20/06/2026

वो दिन जब भारत के लोगों ने पहली बार चलती हुई तस्वीरें देखीं | Watson's Hotel 1896
क्या आप जानते हैं कि भारत में पहली बार सिनेमा कब दिखाया गया था?

7 जुलाई 1896 को बॉम्बे (मुंबई) के प्रसिद्ध Watson's Hotel में भारतीय दर्शकों ने पहली बार चलती हुई तस्वीरें देखीं। उस दिन किसी ने नहीं सोचा था कि यही छोटा सा प्रदर्शन आगे चलकर दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री में से एक की नींव बनेगा।

इस वीडियो में जानिए:

🎬 भारत में पहली फिल्म स्क्रीनिंग की कहानी
🎬 Lumière Brothers की ऐतिहासिक खोज
🎬 Watson's Hotel, Bombay का इतिहास
🎬 भारतीय सिनेमा की शुरुआत कैसे हुई
🎬 Dadasaheb Phalke से पहले का दौर

पूरी डॉक्यूमेंट्री देखने के लिए YouTube पर NARD Archives सर्च करें।

जैसा कि आप जानते हैं कि फ़िल्म चायनागेट के मुख्य खलनायक जगीरा का किरदार निभाने वाले एक्टर मुकेश तिवारी की यह पहली फ़िल्म थ...
24/01/2026

जैसा कि आप जानते हैं कि फ़िल्म चायनागेट के मुख्य खलनायक जगीरा का किरदार निभाने वाले एक्टर मुकेश तिवारी की यह पहली फ़िल्म थी और उन्होंने इसमें अपने जानदार अभिनय से एक बार यह फिर साबित कर दिया कि यूँ ही लोग नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा से प्रशिक्षण प्राप्त नहीं करते । कहा जाता है कि उन्होंने इस भूमिका में परफेक्शन लाने के लिए कई दिनों तक स्नान भी नहीं किया था वैसे इस बात में उहापोह की कुछ ऐसी भी स्थिति है कि कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने लगातार 30 दिनों तक स्नान नहीं किया था तो कुछ में यह संख्या बदलकर 50 हो जाती है । हालाँकि दिन जितने भी हो लेकिन शरीर को दुर्गंध रहित बनाने के लिए इस दौरान मुकेश तिवारी ने परफ़्यूम का ख़ूब इस्तेमाल किया था ।
जगीरा की शानदार भूमिका के लिए मुकेश तिवारी उस साल के लिए दिए जाने वाले फ़िल्मफ़ेयर, ज़ी सिने, स्टार स्क्रीन और आर्शीवाद जैसे तक़रीबन हर अवॉर्ड शो में नॉमिनेट हुए थे । यहाँ तक कि ज़ी सिने अवॉर्ड्स में उन्हें बेस्ट परफॉर्मेंस बाय एन एक्टर इन अ नेगेटिव रोल और बेस्ट डेब्यूट एक्टर कैटेगरी में दो नॉमिनेशंस मिले थे । हालाँकि दुर्भाग्य से मुकेश तिवारी नेगेटिव रोल के लिए कोई अवॉर्ड नहीं जीत पाए और फ़िल्मफ़ेयर, ज़ी सिने तथा स्टार स्क्रीन अवॉर्ड्स तीनों में बेस्ट नेगेटिव रोल के लिए आशुतोष राणा ने फ़िल्म दुश्मन के लिए जीत हासिल की । लेकिन इस बीच मुकेश तिवारी के लिए एक राहत की बात यह रही कि उन्हें बेस्ट डेब्यूट एक्टर के लिए ज़ी सिने अवॉर्ड मिला । हालाँकि यहाँ यह भी एक सच है कि चायना गेट में इतनी दमदार परफॉर्मेंस देने के बाद भी आज तक मुकेश तिवारी को उनके क्षमता के हिसाब से बड़ी भूमिकाएँ नहीं मिली जो कि बेहद निराशाजनक है ।

फ़िल्म कच्चे धागे अपने खतरनाक एक्शन सीक्वेंसेज के लिए भी याद की जाती है, ख़ासकर के इसका ट्रेन सीक्वेंस तो देखते ही बनता है...
23/01/2026

फ़िल्म कच्चे धागे अपने खतरनाक एक्शन सीक्वेंसेज के लिए भी याद की जाती है, ख़ासकर के इसका ट्रेन सीक्वेंस तो देखते ही बनता है । इसकी शूटिंग के दिनों को याद करते हुए फ़िल्म के एक्शन डायरेक्टर टीनू वर्मा बताते हैं कि सैफ अली ख़ान के एक वाहियात हरकत पर उन्होंने सैफ को थप्पड़ मार दिया था और अजय के द्वारा बीच बचाव करने पर उनको को डपट दिया था । टीनू बताते हैं कि इस सीक्वेंस के लिए हमने 7 कैमरे लगाए थे और वो ख़ुद हेलीकॉप्टर पर सवार होकर ऊपर वॉकी-टॉकी से सबको इंस्ट्रक्शन दे रहे थे । अजय और सैफ को पहले ही सब कुछ समझ दिया गया था कि जैसे ही टीनू एक्शन बोलेंगे उन्हें एक्टिंग शुरू कर देनी है । बहरहाल ! जब टीनू ने ऊपर से सारे कैमरामैन और ट्रेन ड्राइवर को इंस्ट्रक्शन देने के बाद एक्शन बोला तो ट्रेन चल पड़ी । इसी समय टीनू ने ट्रेन पर सवार सैफ अली ख़ान और अजय देवगन को भी एक्टिंग शुरू करने का निर्देश दिया । दृश्य के मुताबिक शुरुआत सैफ को करनी थी और अजय को उनका जवाब देना था । टीनू बताते है कि कई बार एक्शन बोलने के बाद भी सैफ ने कोई रिएक्शन नहीं दिया और ट्रेन की गति का मज़ा लेते रहे जिसके कारण एक वक्त के बाद ट्रेन कैमरों के फोकस से आगे निकल गई । टीनू सैफ के इस हरकत से भन्ना गए और हेलीकॉप्टर के पायलट से नीचे उतरने को कहा । भन्नाए टीनू ने सैफ को बुलाया और उनके इस हरकत का कारण पूछा जिसके जवाब में सैफ ने कहा कि जब उन्होंने ट्रेन की छुक-छुक सुनी तो वो उसमें बह गए और मज़ा लेने लगे । इतना सुनते ही टीनू ने आव देखा ना ताव बस तड़ाक से एक थप्पड़ सैफ अली ख़ान को जड़ दिया । मामले की गंभीरता को देखते हुए अजय ने बीच बचाव की कोशिश की लेकिन टीनू ने उन्हें भी डपट दिया । इस घटना को लेकर टीनू को आज भी कोई अफसोस नहीं है उनका कहना है कि जब तक एक्टर टेक्निशियंस की इज़्ज़त नहीं करेगा ना तो फ़िल्म अच्छी बन पाएगी और ना ही वो एक क़ामयाब एक्टर बन पाएगा । ख़ैर ! इसी ट्रेन सीक्वेंस को लेकर एक रिपोर्ट यह भी दी जाती है कि इसके एक दृश्य की शूटिंग के दौरान अजय देवगन ट्रेन से गिरकर मरते-मरते बचे थे । हालांकि इस घटना की पुष्टि ना तो कभी फ़िल्म के निर्देशक मिलन लुथरिया ने की, ना ही स्टंट डायरेक्टर टीनू वर्मा ने और ना ही कभी अजय देवगन ने इस बारे में कुछ बोला । यह कोई एकमात्र किस्सा नहीं है जिसमें सैफ अली ख़ान की मनमानी नज़र आती है बल्कि उनके एक हरकत ने तो फ़िल्म के निर्देशक मिलन लुथरिया को भी नाराज़ कर दिया था । दरअसल सैफ ने फ़िल्म की शूटिंग के बीच में अपने लंबे बालों को छोटा करवा दिया और जब मिलन ने यह देखा तो उन्होंने अपना माथा पीट लिया क्योंकि फ़िल्म के कई दृश्यों की शूटिंग लंबे बालों में हो चुकी थी । ख़ैर ! जब उन्होंने सैफ से बाल कटवाने के पीछे का कारण पूछा तो सैफ ने बेहद बचकाना तर्क दिया, उनका कहना था कि वो छोटे बालों में और ज्यादा हैंडसम और यंग लगेंगे ।

सही मायनों में देखा जाए तो फ़िल्म कच्चे धागे का मुख्य आकर्षण इसके गीत-संगीत है जिसे आनंद बक्शी साहब और उस्ताद नुसरत फतेह ...
23/01/2026

सही मायनों में देखा जाए तो फ़िल्म कच्चे धागे का मुख्य आकर्षण इसके गीत-संगीत है जिसे आनंद बक्शी साहब और उस्ताद नुसरत फतेह अली ख़ान ने पूरे मनोयोग से तैयार किया था । इस फ़िल्म के गानों के बनने की एक बेहद रोचक कहानी ख़ुद अजय देवगन ने सुनाई थी । उनके अनुसार जब नुसरत फतेह अली ख़ान और उनकी टीम इस फ़िल्म का संगीत तैयार करने के लिए मुंबई आई तो वो एक होटल में ठहरे और तय किया कि वो यहीं पर आराम से काम करेंगे । नुसरत साहब जो मोटापे के शिकार थे उन्हें ट्रैवलिंग में बेहद दिक्कत होती थी और चलने-फिरने के लिए लोगों का सहारा लगता था । ऐसे में उन्होंने गीतकार आनंद बक्शी साहब से कहा कि आप मेरे होटल में ही आ जाईए, यही बैठकर गानें तैयार करेंगे । बक्शी साहब को यह बात बेहद नागवार गुजरी क्योंकि उन्हें लगा कि नुसरत साहब उन्हें अपने यहाँ बुला रहे हैं जबकि वो ख़ुद भी तो आ सकते थे । ख़ैर ! बक्शी साहब ने जाने से मना कर दिया जिसके परिणामस्वरूप सिलसिला यह शुरू हो गया कि नुसरत कोई धुन बनाकर भेजते तो बक्शी साहब को पसंद नहीं आती और वो कुछ लिखकर भेजते तो नुसरत साहब को नहीं जँचती । यह सिलसिला कोई महीने भर चला । आखिर में तंग आकर नुसरत साहब ने अपने साथियों के कहा कि उन्हें उठाकर बक्शी साहब के घर पर ले जाया जाए, नहीं तो फ़िल्म के गानें बन ही नहीं पाएँगे । ख़ैर ! जब नुसरत साहब के साथी उन्हें लेकर बक्शी साहब के घर पर पहुँचे तो उन्हें देखकर बक्शी साहब भाव-विह्वल हो उठे । वो नुसरत साहब को ग़लत समझ बैठे थे, उन्हें इनकी शारीरिक अक्षमता का तनिक भी अनुमान नहीं था । ख़ैर ! अगले कुछ समय तक दोनों लीजेंड्स ने ख़ूब मेहनत की जिसके परिणामस्वरूप फ़िल्म के कालजयी गानें बन पाए । यहाँ आपको यह भी बताता चलूँ कि इस फ़िल्म का संगीत तैयार करने के कुछ ही दिनों बाद नुसरत साहब का देहांत हो गया था, ऐसे में फ़िल्म के अधिकतर गानें उनकी मृत्यु के बाद रिकॉर्ड किए गए । कच्चे धागे बॉलीवुड फ़िल्मों के लिए उनके द्वारा तैयार की गई तीसरी व आखिरी एल्बम रही । इससे पहले वो और प्यार हो गया और कारतूस का म्यूजिक तैयार कर चुके थे ।

युगों-युगों से चली आ रही यह परंपरा है कि जब आप सफ़ल और नामचीन बन जाते हैं तो आपके चाहने वाले और आपसे नफ़रत करने वालों दोनो...
21/01/2026

युगों-युगों से चली आ रही यह परंपरा है कि जब आप सफ़ल और नामचीन बन जाते हैं तो आपके चाहने वाले और आपसे नफ़रत करने वालों दोनों प्रकार के लोग आपके जीवन में दखल-अंदाजी करने लगते हैं । हाँ ! जहाँ तक बात चाहने वालों की बात है तो उनके दखल-अंदाजी को तो हम नज़र-अंदाज़ कर सकते हैं लेकिन जब नफ़रत करने वाले आपके जीवन में जहर घोलने का प्रयास करते हैं तो यह समझ नहीं आता कि उनका कैसे सामना किया जाए, उन्हें कैसे मुँहतोड़ जवाब दिया जाए । आज के इस किशोर कुमार स्पेशल पोस्ट में हम उनके जीवन से जुड़ा एक ऐसा ही किस्सा आप सब के साथ बाँटने जा रहें हैं जब किशोर दा के एक लाइव शो को बम से उड़ाने की धमकी दी गई ? साथ ही जानेंगे कि यह धमकी कहाँ और किसने दी थी ? जब यह धमकी अखबारों में छपी तो इस पर पुलिस की क्या प्रतिक्रिया रही थी ? किशोर कुमार जब उस लाइव शो में गए तो ऐसा क्या हुआ कि पुलिस को उनके चारों तरफ सुरक्षा घेरा बनाना पड़ा ताकि कोई भी आतंकी उन तक ना पहुँच सके ? किशोर दा के किस हरकत को देखकर स्टेज पर मौजूद लता मंगेशकर ने कहा कि आप हम सब की सुरक्षा को दांव पर लगा रहे हैं ! ऐसे ही कई दिलचस्प बातों को जानने के लिए पोस्ट के अंत तक बने रहिए ।
दरअसल यह पूरी घटना किशोर कुमार के एक ऐसे लाइव शो की है जिसे कनाडा में आयोजित किया गया था । कार्यक्रम के कुछ ही दिन पूर्व जब शो के आयोजकों ने घोषणा किया कि फलाँ तारीख को किशोर दा का एक लाइव शो रखा गया हैं । कनाडा में रहने वाले हिंदी गानों और फ़िल्मों के शौकीन सभी लोगों के लिए यह एक बड़ी ख़ुशीखबरी थी लेकिन यह खुशख़बरी अगले ही दिन चिंता में तब बदल गई जब एक आतंकवादी संगठन ने इस शो का विरोध किया और कहा कि अगर यह शो आयोजित हुआ तो पूरे ऑडिटोरियम को बम से उड़ा दिया जाएगा । यहाँ आपको मैं उस आतंवादी संगठन का नाम सीधे तो नहीं बता सकता पर इतना तो आप समझ ही गए होंगे कि 70 और 80 के दशक में कौन सा आतंवादी संगठन कनाडा में सक्रिय था । ख़ैर ! अगर आप समझ गए हों तो उसका नाम कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएँ । बहरहाल ! उस धमकी ने कनेडियन और भारतीय अखबारों को ख़ूब मसाला दिया । तरह-तरह की बातें अखबारों के मुख्य पृष्ठ की सुर्खियाँ बनी । किशोर कुमार के चाहने वाले और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें चेताया कि आप कनाडा ना जाए, पर किशोर कुमार तो किशोर कुमार थे एकदम अक्खड़, जिद्दी और लापरवाह ! उन्हें भला इस धमकी की क्या चिंता थी । उन्होंने शो के आयोजकों से कहा कि आप बेधड़क शो के टिकट्स बेचो, किशोर कुमार हर हाल में वहाँ मौजूद होगा । आयोजकों ने यह सुनकर दाँतों तले उँगली दबा ली, उन्हें कोई पहला ऐसा फ़िल्म स्टार मिला था जिस पर इन धमकियों का कोई असर पड़ता ही नहीं दिख रहा था । ख़ैर ! उन आयोजकों ने इस धमकी के संबंध में कनेडियन पुलिस के आला अधिकारियों से बातचीत की । उन अधिकारियों ने कहा कि आप तनिक भी चिंता ना करें हम इस धमकी को काफी गंभीरता से ले रहे हैं ।
आखिरकार वो दिन भी आ गया जिस दिन शो होना था । नियत समय पर किशोर कुमार अपने दल-बल के साथ पहुँचे । एयरपोर्ट से लेकर ऑडिटोरियम तक सुरक्षाकर्मियों का एक भारी जत्था उन्हें मधुमक्खियों की तरह घेरे हुए चल रहा था । ऐसा कुछ माहौल ऑडिटोरियम का भी था, वहाँ पर चप्पे-चप्पे में हथियारबंद सुरक्षाकर्मी मुस्तैद थे, माहौल बहुत तनावपूर्ण होता जा रहा था । हर किसी को गेट पर मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ रहा था और ऑडिटोरियम में जाने से पहले अच्छी तरह से उनकी जाँच पड़ताल हो रही थी । यहाँ तक ​​कि कोक के टीन वाले डब्बे और सिगरेट लाईटर भी ले जाने की सख्त मनाही थी । इस तनावपूर्ण माहौल में भी दर्शकों का उत्साह कम नहीं था कुछ ही देर बाद आखिरकार वो समय भी आ गया जब किशोर दा स्टेज पर जाने वाले थे । ऐसे में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने किशोर दा से बैकस्टेज मुलाकात की और उन्हें सलाह दिया कि वे दर्शकों को उतेजित करने वाले डांसिंग सॉग्स न गाए नहीं तो उन्हें संभालना हम सुरक्षाकर्मियों के मुश्किल हो जाएगा । इसके जगह पर आप अपने उन भावपूर्ण गानों को गाएँ जिससे दर्शक बँध जाए और अनियंत्रित न हों । लेकिन ऐसा कोई पैदा ही नहीं हुआ था जो किशोर दा को आदेश दे सके या फिर उन्हें अपने अनुसार काम करने के लिए मजबूर कर सके । उन्होंने उस पुलिस अधिकारी की बात को सुना जरूर पर नजरअंदाज कर दिया और स्टेज पर जा पहुँचे । स्टेज पर पहुँचते ही जो पहली बात उन्होंने कहा उसने सुरक्षाकर्मियों के बीच बिना बम-विस्फोट के ही खलबली मचा दी । उनका घोषणा था कि मुझे दर्शकों के बीच के कुछ ऐसे ऊर्जावान नवयुवक चाहिए जो हमारे साथ स्टेज में नाच सकें । अभी कोई नवयुवक उन तक पहुँचता इससे पहले ही सुरक्षाकर्मी हरकत में आ गए और स्टेज पर चारों तरफ तुरंत ही एक सुरक्षा घेरा डाल दिया ताकि कोई भी उन तक ना पहुँच सके । मौके पर उपस्थित सुरक्षकर्मियों के शीर्ष अधिकारियों ने किशोर दा को अपनी विवशता बताई और कहा कि "हम दर्शकों से किसी को भी आपके करीब आने की अनुमति नहीं दे सकते, आप हमारी भी मजबूरी समझें" । किशोर दा के साथ स्टेज में खड़ी लता मंगेशकर ने भी उनसे यही निवेदन किया कि आप मौके की नज़ाकत को समझे, इससे आप हम सब की सुरक्षा को दांव पर लगा देंगे । पर किशोर दा तो किशोर दा थे बिल्कुल धुन के पक्के । उन्होंने एक बार फिर से माइक लेकर घोषणा किया कि "ये सुरक्षा अधिकारी मेरे दर्शक बंधुओं को मंच पर आने से रोक रहे हैं क्योंकि इनका कहना है कि इससे मेरे जान को खतरा है । लेकिन, आप ही बताएँ कि कोई मुझे क्यों मारना चाहेगा ? मैं तो केवल एक कलाकार हूँ और आप सभी को खुश करने के लिए यहाँ आया हूँ । किसी को भी इस पर आपत्ति क्यों होगी ? मैं यह बिल्कुल मानने को तैयार नहीं हूँ कि आप में से कोई भी मेरी जान को इसलिए लेना चाहेगा क्योंकि मैं लोगों के बीच आनंद और खुशी फैलाता हूँ । ख़ैर ! इस मंच से मैं सभी सुरक्षकर्मियों को आग्रह करता हूँ कि मेरे दर्शकों को मंच पर आने दिया जाए नहीं तो इन शो में मैं नहीं गाऊँगा । इतना कहकर वो मंच पर ही धरने पर बैठ गए । उस दिन को याद करते हुए किशोर दा की चौथी पत्नी लीना चंदावरकर कहती हैं कि किशोर दा की इन बातों को सुनकर हम सब हतप्रभ थे क्योंकि यह हम सभी के लिए एक अजीब क्षण था । बहरहाल ! इस मुद्दे को हल करने के लिए आयोजकों और सुरक्षकर्मियों के आला अधिकारियों को तक़रीबन एक घंटे का समय लगा । अंत में यह निर्णय लिया गया कि सुरक्षाकर्मी केवल 10 नवयुवकों को स्टेज पर भेजेंगे वो भी अच्छी तरह तलाशी के बाद । ख़ैर ! किशोर दा की माँग सर आँखों पर रखा गया तब कहीं जाकर शो शुरू हो सका । दर्शक उनके साथ घंटों तक स्टेज पर नाचते-गाते और गुलटियाँ मारते रहे जबकि कनेडियन पुलिस दूर खड़ी होकर सब कुछ खामोशी से देखती रही । उस रात ऐसी कोई भी अनहोनी नहीं हुई जिसकी शंका थी । कनेडियन पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने सचमुच ऐसा सुरक्षा जाल बिछाया था जिसे कोई भी आतंकी पार न कर सका । उस रात दर्शकों को घंटों तक झुमाने के बाद किशोर दा ने जाते-जाते एक ऐसा गीत गाया जिसे सुनकर दर्शकों की आँखें आँसुओं से भर गईं । यह गीत था फ़िल्म हम सब उस्ताद है का प्यार बाँटते चलो, क्या हिन्दू क्या मुसलमां हम सब हैं भाई-भाई !

बाप हो तो धर्मेन्द्र जैसा, जिन्होंने इन स्टार्स से छीनकर सनी को दिलाई थी फ़िल्म 'घायल' !फ़िल्म 'घायल' में सनी देओल के द्वा...
21/01/2026

बाप हो तो धर्मेन्द्र जैसा, जिन्होंने इन स्टार्स से छीनकर सनी को दिलाई थी फ़िल्म 'घायल' !
फ़िल्म 'घायल' में सनी देओल के द्वारा निभाए गए नायक की भूमिका के लिए राजकुमार सन्तोषी की पहली पसंद कमल हासन थे । कहा जाता है कि संतोषी साहब ने फ़िल्म में अजय मेहरा की भूमिका उन्हीं को ध्यान में रखकर लिखा था । ख़ैर ! जब उन्होंने फ़िल्म के लिए प्रोड्यूसर तलाशना शुरू किया तो कमल हासन को हीरो लेकर कोई भी इसे प्रोड्यूस करने के लिए तैयार नहीं हुआ । ऐसे में संतोषी साहब ने उन दिनों के सबसे चहेते हीरो मिथुन चक्रवर्ती को फ़िल्म के लिए मनाया और सोंचा कि अब तो प्रोड्यूसर मिल ही जाएंगे लेकिन अब भी परिणाम शून्य रहा क्योंकि संतोषी साहब इससे पहले कला फ़िल्मों के मशहूर निर्देशक गोविंद निहलानी के साथ बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम करते थे । अतः प्रोड्यूसर्स को लग रहा था कि संतोषी एक कला फ़िल्म ही बनाएंगे जो सराही तो ख़ूब जाएगी पर कमाई के मामले में एक ढेला भी कमा नहीं पाएगी । जब कमल हासन के बाद मिथुन चक्रवर्ती को बतौर हीरो लेकर भी राजकुमार संतोषी प्रोड्यूसर ढूँढने में कामयाब नहीं हुए तो उन्होंने ए.सुब्बाराव नामक एक फ़िल्म फाइनेंसर को इसे प्रोड्यूस करने के लिए मनाया लेकिन सुब्बाराव ने शर्त रखी कि फ़िल्म में बतौर हीरो संजय दत्त को लेना होगा, परंतु उनदिनों संजय दत्त काफी व्यस्त थे अतः उन्हें भी फ़िल्म में नहीं लिया जा सका । ऐसे में परेशान राजकुमार संतोषी ने सुब्बाराव को सनी देओल का नाम सुझाया, उन दिनों सनी देओल की राम अवतार और डकैत जैसी फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर कुछ ख़ास अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था और उनका कैरियर थोड़ा बुरे दौर से गुजर रहा था, अतः सुब्बाराव ने संतोषी साहब से कहा कि सनी देओल को अपना फ़ीस कम करना होगा । जब सन्तोषी साहब ने इस बारे में सनी से बात की तो वो अपनी फ़ीस कम करने के लिए तैयार हो गए और कहा कि मेरे फ़ीस कम करने के बारे में अन्य किसी को पता ना चले । ख़ैर ! इसी दौरान सनी देओल और राज कुमार सन्तोषी धर्मेंद्र साहब से मिलने फ़िल्म बंटवारा के सेट पर गए जहाँ बातों-बातों में राजकुमार सन्तोषी ने 'घायल' फ़िल्म का ज़िक्र धर्मेंद से किया और जब धर्मेंद्र को पता चला कि सुब्बाराव के कहने पर सनी अपना फ़ीस कम कर रहे हैं तो उन्हें बेहद ही बुरा लगा । उन्होंने उसी समय राजकुमार सन्तोषी से कहा कि आप सनी को लेकर फ़िल्म की तैयारी शुरू कर दें, मैं इसे ख़ुद प्रोड्यूस करूँगा ।

साल 1979 में आई राजकुमार कोहली की फ़िल्म 'जानी दुश्मन' अपने दौर की सबसे भयंकर डरावनी फ़िल्मों में से एक थी । इस फ़िल्म में ...
21/01/2026

साल 1979 में आई राजकुमार कोहली की फ़िल्म 'जानी दुश्मन' अपने दौर की सबसे भयंकर डरावनी फ़िल्मों में से एक थी । इस फ़िल्म में भूत के द्वारा लाल जोड़े में सजी दुल्हनों पर हमला करते दिखाया गया है । इस बात का ऐसा नकारात्मक प्रभाव पड़ा कि राजस्थान के कुछ गांवों में लोगों ने दुल्हनों को लाल जोड़े में विदाई करना ही छोड़ दिया और उसके जगह पर गुलाबी जोड़े पहनाने लगे । भले ही यह बात सुनने में हास्यास्पद लगे पर शत-प्रतिशत सही है ।

20/01/2026

श्रीदेवी ने अपने जीवन का लगभग एक साल फ़िल्म ख़ुदा गवाह को दे दिए थे । इसी दौरान उन्हें हॉलीवुड फ़िल्म जुरासिक पार्क का भी ऑ...
20/01/2026

श्रीदेवी ने अपने जीवन का लगभग एक साल फ़िल्म ख़ुदा गवाह को दे दिए थे । इसी दौरान उन्हें हॉलीवुड फ़िल्म जुरासिक पार्क का भी ऑफर मिला था जिसे उन्होंने ठुकरा दिया जिसका एक कारण ये भी था कि उनके हॉलीवुड जाने से ख़ुदा गवाह का शेड्यूल बिगड़ जाता और फिल्म का बजट भी बढ़ जाता । स्टारडस्ट पत्रिका ने जुरासिक पार्क की ज़बरदस्त सफलता के बाद श्रीदेवी की आलोचना करते हुए लिखा था कि अगर श्रीदेवी को फ़िल्म में डायनोसोर की भूमिका निभाने का भी अवसर मिल जाता तो उन्हें इतनी शोहरत मिलती, जितनी उन्हें अपनी हिंदी तमिल और तेलुगु तीनों भाषाओं की सभी फ़िल्में मिलाकर भी नहीं मिली ।

Address

Lucknow
226010

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when NARD Archives posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Establishment

Send a message to NARD Archives:

Shortcuts

Share