24/10/2025
हिंदी में कहो, हिंदुस्तान सुनता है ! और हमें ये किसने सिखाया ?
मिले सुर मेरा तुम्हारा !
Fevicol – “फेविकोल का जोड़ ”, Cadbury Dairy Milk – “कुछ खास है ज़िंदगी में”, Bajaj – “हमारा बजाज”, और राजनीतिक नारे “ अभी बार मोदी सरकार” भारतीय भावनाओं, हास्य और लोक-लय का बेहतरीन संगम।
मूँछ में खिलखिलाती हसीं , आँखों में शरारत… और एक लाइन जो करोड़ों के दिल में घर कर जाए।हँसी, हुनर, हिन्दुस्तान सब एक लाइन मेंl । जिसने भारत को भारत में समझाया।
ये दिल से निकली लाइन, अब देश की आवाज़ है क्योंकि वे हमारी भाषा में शहर से गाँव—जब बात अपनी बोली में कही जाए… देश याद रखता है जोड़ जो टूटे नहीं… मिठास जो रहे… सफ़र जो अपना लगे—ऐसी लाइनें भारत बोलता है
आपने हमें सिखाया कि अच्छी advertising, भारत की भाषा बोली बानी से बनती है रसोई की महक, चौक की हँसी, और मैदान की आवाज़ से। आपने research नहीं, insight तलाशा की । strategy नहीं, सच्चाई बोली। आपने कहा सरल कहो, दिल से कहो, बार-बार कहो। इसीलिए आपकी लाइनें campaigns नहीं रहीं यादें बन गईं यादें कभी जाती नहीं वे बस साथ रहती हैं।। किसी ने glue में भरोसा देखा, किसी ने chocolate में अपनापन । किसी ने स्कूटर में पूरे देश का सफ़र।
हम नई स्क्रिप्ट शुरू करते हैं, सबसे पहले उसी मुस्कान को याद करते हैं जो कहती है जब बात दिल से निकले, जब idea देसी हो,अपनी भाषा में हो तो देश गुनगुनाता है।
धन्यवाद, पियूष पांडे सर—आपने ब्रांड नहीं, भारत लिख दिया।आपने ads नहीं, हमारी भाषा बना दी।
आपकी आवाज और कलम तो शांत हो गया लेकिन आपकी गूँज पीढ़ियों तक साथ चलती रहेगी
भावपूर्ण श्रद्धांजलि पियूष सर
कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई
कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते हुए
- रहमान फ़ारिस