रेगमाल Regmaal

रेगमाल Regmaal REGMAAL Film Production is an independent production company working in the area of Film and T.V. productions.

Our aim is the production of challenging films having unique artistic value.

Happy Holi🌺
04/03/2026

Happy Holi🌺

शुभ संक्रांति 🌻
14/01/2026

शुभ संक्रांति 🌻

छतें ऊँची होती गईं,बिल्डिंग बड़ी होती गईं,पर हमारे लोकगीत, हमारे त्यौहार,अब भी आँगन ढूँढते हैं उतरने के लिए।गृह प्रवेश चै...
17/12/2025

छतें ऊँची होती गईं,
बिल्डिंग बड़ी होती गईं,
पर हमारे लोकगीत, हमारे त्यौहार,
अब भी आँगन ढूँढते हैं उतरने के लिए।

गृह प्रवेश चैनल पर आँगन का बुलउवा घर लौटने का एक बहाना है।
जहाँ गीत स्टेज पर नहीं, फिर से ज़मीन पर उतरेंगे…
आँगन बैठकर सुने जाएँगे, और शायद बीच-बीच में
आपकी अपनी दादी की आवाज़ भी सुनाई दे जाए।

हम सबके आँगन को आवाज़ देने आ रही हैं पद्मश्री विद्या विंदु सिंह

घर के सपने से लेकर मंगल भवन तक की कहानी।
गृह प्रवेश : कहानी हर घर की

*****









गृहप्रवेश आँगन | पद्मश्री विद्या विंदु सिंह | बुलउवा | रेगमाल फिल्म्स *****छतें ऊँची होती गईं,...

बीच की खामोशी में कहानी ! फ्रेम के भीतर जो दिख रहा है कहानी हैफ्रेम के बाहर जो छूट गया अर्थ है।सिनेमा इन दोनों के बीच की...
09/11/2025

बीच की खामोशी में कहानी !

फ्रेम के भीतर जो दिख रहा है कहानी है
फ्रेम के बाहर जो छूट गया अर्थ है।
सिनेमा इन दोनों के बीच की खामोशी है
जहाँ नज़र रुकती है, और कल्पना चल पड़ती है।

हिंदी में कहो, हिंदुस्तान सुनता है ! और हमें ये किसने सिखाया ? मिले सुर मेरा तुम्हारा ! Fevicol – “फेविकोल का जोड़ ”, Cad...
24/10/2025

हिंदी में कहो, हिंदुस्तान सुनता है ! और हमें ये किसने सिखाया ?

मिले सुर मेरा तुम्हारा !
Fevicol – “फेविकोल का जोड़ ”, Cadbury Dairy Milk – “कुछ खास है ज़िंदगी में”, Bajaj – “हमारा बजाज”, और राजनीतिक नारे “ अभी बार मोदी सरकार” भारतीय भावनाओं, हास्य और लोक-लय का बेहतरीन संगम।

मूँछ में खिलखिलाती हसीं , आँखों में शरारत… और एक लाइन जो करोड़ों के दिल में घर कर जाए।हँसी, हुनर, हिन्दुस्तान सब एक लाइन मेंl । जिसने भारत को भारत में समझाया।

ये दिल से निकली लाइन, अब देश की आवाज़ है क्योंकि वे हमारी भाषा में शहर से गाँव—जब बात अपनी बोली में कही जाए… देश याद रखता है जोड़ जो टूटे नहीं… मिठास जो रहे… सफ़र जो अपना लगे—ऐसी लाइनें भारत बोलता है

आपने हमें सिखाया कि अच्छी advertising, भारत की भाषा बोली बानी से बनती है रसोई की महक, चौक की हँसी, और मैदान की आवाज़ से। आपने research नहीं, insight तलाशा की । strategy नहीं, सच्चाई बोली। आपने कहा सरल कहो, दिल से कहो, बार-बार कहो। इसीलिए आपकी लाइनें campaigns नहीं रहीं यादें बन गईं यादें कभी जाती नहीं वे बस साथ रहती हैं।। किसी ने glue में भरोसा देखा, किसी ने chocolate में अपनापन । किसी ने स्कूटर में पूरे देश का सफ़र।

हम नई स्क्रिप्ट शुरू करते हैं, सबसे पहले उसी मुस्कान को याद करते हैं जो कहती है जब बात दिल से निकले, जब idea देसी हो,अपनी भाषा में हो तो देश गुनगुनाता है।

धन्यवाद, पियूष पांडे सर—आपने ब्रांड नहीं, भारत लिख दिया।आपने ads नहीं, हमारी भाषा बना दी।

आपकी आवाज और कलम तो शांत हो गया लेकिन आपकी गूँज पीढ़ियों तक साथ चलती रहेगी

भावपूर्ण श्रद्धांजलि पियूष सर

कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई
कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते हुए
- रहमान फ़ारिस

20/10/2025

शुभ दीपावली 🌺

Series: Grihpravesh – Architect TributeFeaturing: Ar. Savita Agarwal Presented रेगमाल Regmaalसपनों का नक्शा, समय की इमार...
21/09/2025

Series: Grihpravesh – Architect Tribute
Featuring: Ar. Savita Agarwal
Presented रेगमाल Regmaal

सपनों का नक्शा, समय की इमारत।

‘गृहप्रवेश अर्क’ भारत के श्रेष्ठ आर्किटेक्ट्स को समर्पित ट्रिब्यूट सीरीज़ है—जहाँ उनकी दृष्टि, काम और विरासत को कहानियों में संजोया जाता है। इस एपिसोड में: आर्किटेक्ट सविता अग्रवाल, जिन्होंने सपनों को समय की इमारतों में बदला।

मुज़फ्फरनगर के ज़मींदार परिवार में जन्मी एक बच्ची—जिसके पिता ने समय से आगे सोचकर बेटियों की पढ़ाई पर भरोसा किया। यही विश्वास बना सविता अग्रवाल की जीवन-यात्रा का आधार।

रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज से आर्किटेक्चर की पढ़ाई के बाद, अपने जीवनसाथी श्री रोहित अग्रवाल के साथ उन्होंने “म्यूरलेज” फर्म की नींव रखी—जिसने देश के नक्शे पर ऐसी इमारतें दीं जिनमें सोच, कला और भावनाएँ साथ-साथ साँस लेती हैं।

गृहप्रवेश ‘अर्क’ में हम सलाम करते हैं इस अद्वितीय आर्किटेक्ट की सोच, समर्पण और विरासत को—क्योंकि हर मील का पत्थर, कभी एक सपना था।


Watch more: Visionaries in Indian Architecture, Women in Architecture, Design Legacy

गृहप्रवेश अर्क – सपनों का नक्शा, समय की इमारत।‘गृहप्रवेश अर्क’ भारत के श्रेष्ठ आर्किटेक्ट्स को समर्पित ट्रिब्यू....

यही है Hero’s Journey जहाँ असली जीत सिर्फ़ परीक्षा पास करने में नहीं,बल्कि अपने उद्देश्य को पहचानने और नई राह गढ़ने में ...
20/08/2025

यही है Hero’s Journey
जहाँ असली जीत सिर्फ़ परीक्षा पास करने में नहीं,
बल्कि अपने उद्देश्य को पहचानने और नई राह गढ़ने में है।

एक युवा सपनों और उम्मीदों से भरा।
किताबों के ढेर, रात की लंबी तैयारी, और अंततः यू पी एस सी की परीक्षा को जीत लेना।
यह थी उसकी बाहरी यात्रा
एक कुर्सी तक पहुँचना, एक पहचान बनाना, और समाज की सेवा करना।

पन्द्रह साल से अधिक का सफ़र।
पूर्व में आई आर एस अधिकारी के तौर पर वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय में अहम जिम्मेदारियां निभाईं।
कर प्रशासन, ई-गवर्नेंस और पब्लिक सर्विस में नई मिसालें कायम कीं।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
कुछ साल बाद और भीतर से एक सवाल उठता है

‘क्या यही मेरी मंज़िल है?’

यहीं शुरू होती है उसकी भीतरी यात्रा।
जहाँ वह स्थिरता को छोड़ता है,
सुरक्षा का दायरा तोड़ता है,
और उद्यमिता की राह चुनता है।

अंजनी कुमार पांडेय
आज एक प्रमुख रियल एस्टेट समूह में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और बिज़नेस हेड,
पर सबसे बड़ा परिचय सार्वजनिक सेवा, शिक्षा और समुदाय के विकास के प्रति गहरा जुनून।

यह यात्रा सिर्फ़ करियर की नहीं, बल्कि सेवा से नेतृत्व और नेतृत्व से राष्ट्र निर्माण की है।

यही है Hero’s Journey
जहाँ असली जीत सिर्फ़ परीक्षा पास करने में नहीं,
बल्कि अपने उद्देश्य को पहचानने और नई राह गढ़ने में है।

अगर आपने कभी कुछ नया करने का सपना देखा है,
अगर आपके भीतर एक बेचैनी है — कुछ कर दिखाने की,
तो यह एपिसोड आपके लक्ष्य तक पहुँचने का Framework साबित होगा।

Framework — क्योंकि कुछ कहानियाँ सिर्फ सुनने के लिए नहीं होतीं, महसूस करने के लिए होती हैं।

📍Subscribe & turn on the bell icon – क्योंकि कुछ कहानियाँ सिर्फ सुनने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए होती हैं।

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!जय-हिंद 🇮🇳
14/08/2025

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!

जय-हिंद 🇮🇳

सबसे प्यारी सुबह तेरीसबसे रंगीं तेरी शामतुझ पे दिल क़ुरबान ...गणतंत्र दिवस की बधाई 🇮🇳जय हिंद
26/01/2025

सबसे प्यारी सुबह तेरी
सबसे रंगीं तेरी शाम
तुझ पे दिल क़ुरबान ...

गणतंत्र दिवस की बधाई
🇮🇳जय हिंद

नव वर्ष प्रकृतिमय हो 🌳मन मेंजगह है जितनीउस सब में मैंनेफूल कीपंखुरियांबिछा दी हैं योंकि जो कुछमन में आएमन उसेफूल की पंखु...
01/01/2025

नव वर्ष प्रकृतिमय हो 🌳

मन में
जगह है जितनी

उस सब में मैंने
फूल की
पंखुरियां
बिछा दी हैं यों

कि जो कुछ
मन में आए

मन उसे
फूल की पंखुरियों पर
सुलाए !
-भवानी प्रसाद मिश्र

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