05/09/2026
जब जुल्म और नाइंसाफ़री के सामने ब्डे-बडे लोग खामोश होजाते हैं, तब जामिया मिलिया इस्लामिया की पूर्व छात्रा, बीबीसीलंदन से क्ंड इुंटरनेशनल जर्नलिस्ट, सऊदी टीवी की पूर्व न्यूज़रएंकर "हुदा ज़रीवाला' जैसी सशक्त और जाबॉज़ महिलाएंसमाज की ढाल बनकर खडी होती हैं
कल रात दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन के भीतर जो नज़ारापूरे देश ने देखा, उसने साबित कर दिया कि हक और सच्चाई कीलड़ाई कैसे लड़ी जाती है हमारे मुस्लिम समाज को अपनी ऐसीउच्च शिश्षित और वैशिविक स्तर पर अनूभवी बेटियों पर नाज़ है, जो वक्त आाने पर कौम और समाज की मजलूम बहनों के लिएकिसी भी ताकत के सामने दीवार बनकर खड़ी होना जानती हैं।हुदा जी ने ऑन-डचयूटी महिला पत्रकारों (शाहीन खान औरनफीसा खान) के साथ हुई मारपीट और बदसलूकी के खिलाफआधी रात को पुलिस अधिकारियों की ऑखों में ऑखें डालकरप्रशासन को जों आईना दिखाया है, वह हर एक नागरिक काहौसला बढ्वाने वाला ह।
वर्थी के रसुख और भेदभावपूर्ण मानसिकता के सामने बिना डरे पूरी मुस्तैदी के साथ न्याय की मांग करना यह दिखाता है किआज हमारी बहनें किसी से पीछे नहीं हैं हुदा जी की यह दहाड़सिर्फ दो पत्रकारों के लिए नहीं, बल्कि देश में सच की आवाज़बुलंद करने वाले हर इंसान के लिए एक संबल है।
हमें फरख्र है हुदा ज़रीवाला जी जैसी बूलंद और निडर आवाज़ापर, जो शाहीन और नफीसा को न्याय दिलाकर ही दम लेंगी जबतक ऐसी जाबॉज़ बेटियों हमारे समाज का नेतुत्व कर रही हैं, तबतक किसी भी मजलूम की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता!
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