22/07/2026
🌿 सादर आमंत्रण 🌿
स्मृतिशेष वीरेन्द्र ठाकुर ‘वियोगी’ जीक स्मृतिमे
श्रीकृष्ण पूजनोत्सव एवं शिक्षक दिवसक पावन अवसर पर आयोजित
'मैथिली कवि सम्मेलन'
मातृभाषा, साहित्य आ संस्कृतिक संरक्षण-संवर्धनक उद्देश्यसँ आयोजित एहि गरिमामय साहित्यिक समारोहमे अपने लोकनि सादर आमंत्रित छी।
दिनांक : 5 सितम्बर 2026 (शनि दिन)
समय : अपराह्न 2:00 बजे
स्थान : ठाकुर सभागार, ठाकुर नेचुरोपैथी, माऊंबेहट, मनीगाछी (दरभंगा)
आयोजक
डॉ. संजय कुमार ठाकुर
निदेशक, ठाकुर नेचुरोपैथी
संयोजक
सुमित सुमन
शिम्मर फाउंडेशन, दरभंगा
📞 संपर्क (Call / WhatsApp): 9135905618
अपने लोकनिक स्नेहिल एवं गरिमामय उपस्थिति एहि साहित्यिक अनुष्ठानकेँ सफल, सार्थक आ अविस्मरणीय बनाओत।
सादर!
आयोजन समिति
ध्यातव्य जे स्मृतिशेष वीरेन्द्र ठाकुर 'वियोगी' मैथिलीक चर्चित गीतकार-नाटककार छलाह। हिनक जन्म 2 जनवरी 1942 ई. मे दरभंगा जिलाक माऊँबेहट गाममे भेल छलनि। बाल्यावस्थामे पिताक निधन भऽ जाएबाक कारणे नेनपन संघर्षपूर्ण रहलनि, तथापि दृढ़ इच्छाशक्ति आ अध्ययनशीलताक बल पर ओ अपन शिक्षा आ साहित्य-साधनाक यात्रा निरन्तर जारी रखने रहलाह। 1960 ई. मे सरिसो उच्च विद्यालयसँ प्रवेशिका परीक्षा उत्तीर्ण कएलनि। तत्पश्चात् बेनीपट्टी शिक्षक-प्रशिक्षण विद्यालयसँ शिक्षक-प्रशिक्षण प्राप्त कएलनि तथा स्नातक प्रथम वर्ष, नवीन शास्त्री, नवीनाचार्य एवं साहित्यालंकार आदि परीक्षा सभ उत्तीर्ण कएलनि। शिक्षण-कार्य हिनक प्रमुख जीविका रहलनि, आ एकरे संग-संग साहित्य-सृजनमे सेहो सक्रिय रहलाह।
छात्रजीवनसँहि हिनक साहित्य, विशेषतः नाट्य-विधाक प्रति बेस अनुराग छलनि। प्रारम्भमे गेय पदक रचना कयलनि आ पछाति नाटक-लेखनमे विशिष्ट योगदान देलनि। सामाजिक आ ऐतिहासिक विषय-वस्तु पर आधारित कतोक नाटकक रचना कयलनि, जाहिमे 'अभिलाषा' विशेष रूपसँ चर्चित-प्रशंसित अछि। एहि नाटकमे सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना आ परिवर्तनक आकांक्षाक सशक्त स्वर भेटैत अछि। अपन सृजनशीलता, सामाजिक सरोकार आ नाट्य-दृष्टिक कारण वीरेन्द्र बाबू मैथिली नाट्य-साहित्यमे एक सम्मानित स्थान छेकने छथि। एकर अतिरिक्त कदमजोड़ी फूल, रक्तकाल, व्यवस्थामे दाह वस्त्र, चाणक्य, कालिदास, वैदिक गांव माऊॅंबेहट, राजा-भोज आदि प्रकाशित कृति छनि। 6 सितम्बर 2005 ई.कें ई नश्वर शरीरकें त्यागि अनन्त यात्रा पर चलि गेलाह।